हिसार। गो सेवा आयोग के चेयरमैन श्रवण कुमार गर्ग ने शुक्रवार दोपहर बाद अधिकारियों व गोशाला प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रदेश को गोवंश मुक्त करने के लिए फाइनल अभियान चल रहा है। इसके तहत हिसार को सबसे पहले गोवंश मुक्त करने का लक्ष्य है। उन्होंने नगर निगम अधिकारियों को 15 दिन तक अभियान चलाकर नंदी, बछड़े व बीमार गायों को पकड़ने के निर्देश दिए।
चेयरमैन ने खासतौर पर कहा कि अभियान के दौरान किसी मालिक की गाय को न पकड़ा जाए, क्योंकि इससे झगड़ा आदि होगा और अभियान में बाधा आएगी। इसके अलावा हांसी, उकलाना, बरवाला व आदमपुर को अपनी क्षमता के अनुसार अभियान चलाने को कहा है। बैठक में चेयरमैन ने निगम अधिकारी से पूछा कि प्रतिदिन कितने नंदी पकड़ सकते हो। इस पर एएमसी प्रदीप हुड्डा ने कहा कि 50 से 60 नंदी पकड़े जा सकते हैं। चेयरमैन ने पूछा क्या 100 पकड़े सकते हो तो एएमसी ने कहा कि नहीं पकड़े जा सकते। इस पर श्रवण कुमार ने कहा कि प्रतिदिन की 70 की औसत बनाए। इसके लिए टीम बढ़ाएं या फिर दिहाड़ी पर मजदूर लगाएं।
चेयरमैन ने पूछा कि कितने दिनों में सभी नंदी पकड़े जा सकते हैं। एएमसी ने कहा कि समय नहीं बता सकते, क्योंकि उस समय गांव वाले भी नंदी शहर में छोड़ने लग जाएंगे। चेयरमैन ने कहा कि शहर में कितने नंदी होंगे तो एएमसी ने कहा कि लगभग 500 होंगे। श्रवण गर्ग ने कहा कि फिर तो जल्दी पकड़ो।
चेयरमैन श्रवण गर्ग ने कहा कि सभी नंदी पकड़ने के बाद पशुपालकों को तीन दिन का नोटिस दिया जाएगा। नोटिस की अवधि पूरी होने के बाद सड़क पर मिलने वाली गायों को जब्त कर लिया जाएगा। बैठक में अधिकारियों व गोशालाओं ने पड़ोसी राज्यों से पशु यहां छोड़ने का मामला उठाया तो चेयरमैन ने कहा कि इसके लिए बॉर्डर सील करवा देंगे। सरकार के हाथ बहुत लंबे हैं। अभी पशु छोड़ने पर पशुपालकों को जुर्माना देना होता है। मगर अब गोशालाएं पकड़े गए पशुओं को छोड़ती है तो उन पर जुर्माना किया जाएगा और तीसरी बार में उक्त गोशाला को ब्लैक लिस्ट कर दिया जाएगा। टोल फ्री नंबर तक जारी किया जाएगा।
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ग्रांट लेने के लिए हर माह पोर्टल पर करें अपडेट
चेयरमैन ने कहा कि सरकार ने 52 गोशालाओं के लिए करीब 4.38 करोड़ रुपये की ग्रांट जारी की है। अगर किसी गोशाला के खाते में यह ग्रांट नहीं आई है तो अगले 10 दिन में आ जाएगी। उन्होंने कहा कि ग्रांट को लेकर पुनर्वास पोर्टल शुरू हो गया है। हर माह गोशालाओं को पोर्टल पर अपडेट करना होगा कि उन्होंने कितने पशु लिए हैं। यह संख्या 50 से कम नहीं होनी चाहिए। अगर पोर्टल पर यह डाटा अपडेट नहीं होगा तो ग्रांट नहीं आएगी। पहले यह डाटा पशुपालन विभाग के एसडीओ के पास जाएगा तो इसकी जांच करेगा। फिर रिपोर्ट डिप्टी डायरेक्टर के पास जाएगी, जो इसे आयोग के पास भेजेंगे, जहां यह ग्रांट मंजूर की जाएगी।
उन्होंने गोशालाओं को निर्देश दिए कि वह पुनर्वास के तहत आए पशुओं पर पिंक टैग अवश्य लगाएं। पशुपालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. सुभाष जांगड़ा ने बताया कि जिले में 64 गोशालाएं पंजीकृत हैं, जिनमें 56700 गोवंश हैं। अभी तक इनमें से 19 गोशालाओंं ने 9750 गोवंश लेने पर सहमति जताई थी। अभी तक ये गोशालाएं 4640 गोवंश ले चुकी हैं।
चेयरमैन बोले-अग्रोहा के रास्ते हो रही गोवंश की तस्करी
बैठक में चेयरमैन बोले कि अग्रोहा के रास्ते गोवंश की तस्करी की जा रही है। दो बार उन्होंने खुद गाड़ी पकड़ी है। यहां गश्त बढ़ाई जाए। उन्होंने खासतौर पर कहा कि गोतस्कर पर मुकदमा दर्ज किया जाए न कि गोभक्तों पर। इस दौरान गोभक्त अनिल आर्य ने बताया कि हांसी के ढाणा गांव से गोवंश को उठाया जा रहा है। अब यहां गोवंश नहीं दिख रहा है।
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इन गोशालाओं ने और पशु लेने पर जताई सहमति
बैठक में जिले की कई गोशालाओं ने और पशु लेने को लेकर सहमति दी। इसमें धान्सू गोशाला ने 200, कुरुक्षेत्र गोशाला ने एक हजार, कंवारी व जुगलान गोशाला ने 100-100, कुलेरी गोशाला ने 50 और उकलाना गोशाला ने 200 गोवंश लेने की हामी भरी। डोभी गोशाला प्रतिनिधि ने कहा कि गोशाला में 10 हजार से ज्यादा पशु है। अस्पताल भी है, लेकिन पशु चिकित्सक 6 किलोमीटर दूर से आता है तो इस पर चेयरमैन ने कार्रवाई करने को कहा। एडीसी सी जयाश्रद्धा ने कहा कि जो गोशालाएं हाईवे के किनारे हैं, वह रिफ्लेक्टर टेप पशुओं पर लगवाएं, ताकि पशुओं के कारण होने वाले सड़क हादसों में कमी आए। रिफ्लेक्टर टेप वह उपलब्ध करवा देंगे।