हिसार। नगर निगम में भ्रष्टाचार के मामले निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल तो खड़े करते ही हैं पर ताज्जुब इस बात का है कि भ्रष्टाचार कबूल करने के बावजूद कार्रवाई के नाम पर चुप्पी छाई है। कई मामलों में तो भ्रष्टाचारियों ने कबूल किया कि उन्होंने गलत किया है। इनमें से कुछ की जांच पूरी हुई तो कई फाइलें आज भी धूल फांक रही है। कई मामलों में निगम प्रशासन ने पुलिस को शिकायत दी, लेकिन पुलिस ने प्राथमिकी तक दर्ज करना मुनासिब नहीं समझा और मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया। कई शिकायत दिए एक साल से ज्यादा समय बीत चुका है। पुलिस और निगम की लापरवाही का फायदा भ्रष्टाचारियों को मिल रहा है।
सूत्रों के मुताबिक एक अगस्त 2024 को पुलिस को दी शिकायत के अनुसार कृष्ण कुमार नाम के व्यक्ति ने धोखे से शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) की जमीन पर अपने व परिवार के सदस्यों के नाम कुछ संपत्ति आईडी बनवा ली। इस बारे में झज्जर निवासी एक व्यक्ति की शिकायत पर जांच की गई तो पता चला कि यह एचएसवीपी की मलकीयत है। इस आधार पर प्रॉपर्टी आईडी से कृष्ण कुमार व उसके परिवार के सदस्यों के नाम व मोबाइल नंबर हटाकर एचएसवीपी का नाम कर दिया गया। इनमें से एक प्रॉपर्टी आईडी पर कृष्ण कुमार की पत्नी ने अपना नाम व मोबाइल नंबर दर्ज करवाने के लिए आपत्ति लगा दी। इस पर उसका नाम व मोबाइल नंबर दर्ज कर दिया गया, लेकिन वैध मालिकाना दस्तावेज न होने के कारण नगर निगम की तरफ से आपत्ति आवेदक को लौटा दी गई। इसके बाद एमई कर्मपाल की आईडी से इस प्राॅपटी आईडी को दर्शना देवी के नाम दर्ज कर दिया गया, जबकि उसकी तरफ से कोई आपत्ति दर्ज नहीं करवाई गई थी। मामला सामने आने पर प्रॉपर्टी आईडी में फिर से एचएसवीपी कर दिया गया। इस बारे में रिपोर्ट मांगे जाने पर एमई ने बताया कि डाटा एंट्री ऑपरेटर अजय कुमार को एनडीसी संंबंधी कार्यों में सहयोग के लिए लगाया हुआ है और उससे जवाब मांगा है। अजय ने जवाब दिया कि मैंने इस प्रॉपर्टी आईडी की जानकारी अपडेट की थी और अधिकारी के संज्ञान में लाए बिना यह कार्य किया। इसके लिए अधिकारी के मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया। बाद में अजय कुमार ने त्याग पत्र दे दिया।
संपत्ति का विकास शुल्क 25 हजार रुपये से जीरो किया
29 जुलाई 2024 को पुलिस को दी शिकायत में निगम प्रशासन ने बताया कि आजाद नगर थाने से प्राप्त एक मामले की जांच में सामने आया कि एक प्रॉपर्टी आईडी मल्टीपल लिंक में चले जाने से डी-एक्टिवेट हो गई है। निगम में कार्यरत बेलदार सुमित ने सचिव दीपक के एडमिन पोर्टल का दुरुपयोग करते हुए संपत्ति का विकास शुल्क 25 हजार रुपये से जीरो कर दिया। इस प्रॉपर्टी की एनडीसी बिना विकास शुल्क का भुगतान किए जारी कर दी गई, जिससे निगम को वित्तीय हानि हुई है। इस मामले में जब सुमित से स्पष्टीकरण मांगा गया तो कहा कि कर्मचारी गोपाल जमाबंदी, इंतकाल व एक अन्य एप्लीकेशन लेकर उसके पास आए। गोपाल ने कहा कि यह मेरे जानकार का काम है। इस पर मैंने अपने स्तर पर सचिव को बताए बिना आईडी को एक्टीवेट कर दिया। इसके बाद गोपाल ने बाहर बुलाया और कहा कि ये लो काम के 5 हजार रुपये। जांच के दौरान गोपाल ने कबूल किया कि वह जिंदगी में पहली बार शार्मिंदा है कि सुमित को 5 हजार रुपये दिए और 3 हजार खुद लिए। हालांकि इस मामले में दोनों आरोपियों ने निगम के अधिकारियों पर प्रताड़ित करने के आरोप लगाए थे।
फर्जी जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र सीआरएस पोर्टल पर अपलोड
- बरवाला निवासी दया प्रसाद की कैमरी रोड स्थित एक निजी अस्पताल में बीमारी से मौत बताकर उसकी रिपोर्ट जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र के सीआरएस पोर्टल पर अपलोड कर दी। इसके बाद दया प्रसाद का मृत्यु प्रमाण पत्र बनाकर जारी कर दिया गया। निगम अधिकारियों के अनुसार दया प्रसाद ने लाखों रुपये का बीमा करवा रखा है। बीमा कंपनी के कर्मचारी सत्यापन के लिए अस्पताल पहुंचे तो पता चला कि जो रिपोर्ट अस्पताल की तरफ से अपलोड की गई है उस पर किए गए हस्ताक्षर फर्जी है। अस्पताल प्रशासन ने इस बारे में निगम अधिकारियों को अवगत करवाया। इसके बाद निगम की तरफ से पुलिस को शिकायत दी गई।
मेयर के पिता को जी-8 की फर्जी रसीद थमाई
पूर्व मेयर गौतम सरदाना के पिता को जी-8 की फर्जी रसीद थमा दी गई। सरदाना के पिता को जनस्वास्थ्य विभाग के एक परिचित अधिकारी ने प्रॉपर्टी टैक्स भरने के लिए रुपये सौंपे। उन्होंने उस राशि को जमा कराने के लिए मेयर स्टाफ को दे दिया। फर्जी जी-8 का मामला सामने आया तो उस प्रॉपर्टी का नया बिल निकलवाया गया, जिसमें पूर्व में भरी राशि भी जुड़कर आई हुई थी। जब वह रसीद देखी तो खुलासा हुआ कि रुपये भी जमा नहीं हुए हैं और रसीद भी नकली पाई गई।
5 हजार प्रॉपर्टी की बैलेंस शीट शून्य करवाई
15 सितंबर 2016 को नगर निगम की ओर से एक निजी कंपनी को पत्र जारी कर 5 हजार प्रॉपर्टी की बैलेंस शीट शून्य करवा दी गई, जबकि करोड़ों का प्रॉपर्टी टैक्स बकाया था। मामले का खुलासा पूर्व मेयर शकुंतला राजलीवाला के कार्यकाल में हुआ। पार्षदों की मांग पर जांच कमेटी बना दी गई, लेकिन अधिकारियों ने खुद को पाक साफ दिखाया। वर्ष 2021 में पार्षदों ने दोबारा से आवाज उठाई तो तत्कालीन सीनियर डिप्टी मेयर के नेतृत्व वाली कमेटी ने फिर से जांच शुरू की। पांच हजार में से 4400 प्रॉपर्टी से टैक्स की रिकवरी हो गई। इसमें 14 करोड़ से अधिक का राजस्व नगर निगम को मिला। मगर पार्षदों की कमेटी ने जांच को अधूरा ही छोड़ दिया।
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पुलिस प्रशासन को भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई के लिए रिमांइडर भेजे जाएंगे। कई मामले मेरे यहां आने से पहले के हैं। इनकी मुझे जानकारी नहीं है। फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र मामला निगम से संबंधित नहीं है। कोई व्यक्ति फर्जी दस्तोवज बनाकर अपलोड कर दे तो उसमें निगम क्या कर सकता है। फिर भी इसकी जांच करवाई जाएगी। पूर्व मेयर के पिता वाले मामले में आरोपी कर्मचारी को चार्जशीट किया जा चुका है और चार्जशीट पैनल्टी के लिए भेजी जा चुकी है। वह आरोपी फिलहाल निलंबित है। बैलेंस शीट शून्य करने वाला मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। - नीरज, निगमायुक्त
भ्रष्टाचार को लेकर भाजपा की जीरो टोलरेंस की नीति है। अभी मेरे संज्ञान में दो मामले आए हैं, जिनकी जांच करवाई जा रही है। निगम में भ्रष्टाचार बिल्कुल सहन नहीं किया जाएगा। कोई भ्रष्टाचार के मामले में संलिप्त मिलता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करवाई जाएगी। - प्रवीण पोपली, मेयर