अग्रोहा मेडिकल कॉलेज की कोविड-19 लैब में अब तक 4 लाख 88 हजार 63 कोरोना सैंपल की जांच हो चुकी हैं। इनमें 26218 सैंपल की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई है। यह लैब पिछले साल के जून माह से लेकर अब तक नियमित रूप से चल रही है। लैब के चिकित्सक और डॉक्टरों को हौसला इतना बुलंद है कि कोरोना की चपेट में आने के बावजूद स्वस्थ हुए फिर काम में जुट गए। इन लोगों ने होली और दीपावली के त्योहार में भी छुट्टी किए बिना जांच की। स्टाफ का कहना है कि इस समय सेवा से बढ़कर उनके लिए कुछ और नहीं है।
मेडिकल कॉलेज के इस लैब में हिसार जिले के अलावा फतेहाबाद, सिरसा, भिवानी सहित अन्य जिलों के सैंपल भी जांच के लिए आते हैं। फिलहाल लैब में चिकित्सक, एलटी एवं पैरामेडिकल स्टाफ सहित कुल 30 स्वास्थ्य कर्मवीर सैंपल की जांच करने में लगे हैं। लैब के रिसर्च वैज्ञानिक से मिली जानकारी के अनुसार अग्रोहा की लैब में दो आरटीपीसीआर मशीन हैं। अबकी बार वायरस में भी काफी बदलाव हुआ है। इसलिए प्रत्येक सैंपल गहनता से जांच करना पड़ता है, जिस कारण जांच में समय लगता है। संक्रमण का पता लगाने के लिए प्रत्येक सैंपल में पुलिंग का समय लगता है। ऐसे में लैब में प्रतिदिन 1500 सैंपल की जांच हो रही है। यह भी दिन रात लगातार शिफ्ट में काम करने से संभव है।
ऐसे हो रही जांच : पहले लैब में तीन मशीनें थीं। इनमें से एक मशीन करनाल चली गई है, जिस कारण दो मशीनों से ही जांच हो रही है। इसके अलावा पहले 5 सैंपल को एक में मिलाकर एक का ही पूल बनाया जाता था। पॉजिटिव मिलने पर सभी की अलग-अलग जांच करते थे। मगर अब सभी सैंपल के अलग-अलग पूल बनाने पड़ते हैं। एक साथ 96-96 सैंपल की 7 प्लेटें मशीन में लगाई जाती हैं, जिसकी रिपोर्ट 3 घंटे बाद आती है।
कोशिश रहती है कि मरीजों को जल्द रिपोर्ट मिले : पेशे से चिकित्सक होने की वजह से मेरा मेडिकल लाइन से जुड़ाव है। इसलिए मुझे मरीजों की सेवा करने के लिए आना पड़ता है, जिस कारण घर भी नहीं रह सकती। बाकी लोगों से उम्मीद है कि वे घर पर ही रहें। यही कोशिश रहती है कि जल्द से जल्द मरीजों को सैंपल की रिपोर्ट तैयार कर दें, ताकि वे आगे संक्रमण न फैलाएं। मैं पिछले साल कोरोना पॉजिटिव भी आई थी। फिर भी पिछले साल से लगातार लैब में सैंपल जांच के लिए निरंतर ड्यूटी कर रही हूं। -डॉ. प्रियंका मिल, कोविड-19 लैब में कार्यरत।
वर्क लोड अधिक, लैब की क्षमता कम : इस समय न तो लोग रुक रहे हैं और न ही यह वायरस कंट्रोल हो रहा है। सैंपल का वर्क लोड इतना हो गया है कि एक या 2 दिन में हमारे पास पहुंच रहे हैं। लैब की सैंपल जांच की क्षमता कम है। अब अस्पतालों में भी बेड की बहुत कम जगह बची है। आमजन की सेवा के लिए हम लैब में एक साल से मेहनत कर रहे हैं, पर इसका अभी तक कोई लाभ नहीं मिला है। कोरोना खत्म होने की बजाए बढ़ता गया। -डॉ. शेर सिंह, रिसर्च वैज्ञानिक, कोविड-19 लैब में कार्यरत।
हौसला नहीं टूटा है, टीम दे रही लगातार साथ : पॉजिटिव आने पर मैं डरी नहीं। यह ऐसा दौर है, जिसमें हर किसी को संक्रमण हो सकता है। अभी भी मेरा मनोबल काफी मजबूत है। हौसला नहीं टूटा है। आगे भी मैं अपनी ड्यूटी को जिम्मेदारी के साथ निभाऊंगी। अभी तक लैब में अपनी टीम के साथ करीब 5 लाख सैंपल की जांच कर चुके हैं। हमारा स्टाफ भी सराहनीय काम कर रहा है। पिछले साल से अब तक लगातार ड्यूटी देकर साथ दे रहे हैं। - प्रो. कंवलप्रीत कौर, नोडल अधिकारी, माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट, मेडिकल कॉलेज, अग्रोहा।
लापरवाही बरतने का परिणाम हमारे सामने है : यह मुश्किल दौर है। फिर भी हमें हिम्मत रखनी पड़ेगी। 90 साल के बुजुर्ग भी कोरोना से जंग जीत रहे हैं। समय पर काढ़ा व दवा लें। संक्रमण रोकने की जिम्मेदारी खुुद पर लें। एक व्यक्ति की लापरवाही कई लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। हर रोज 140 किलोमीटर के आसपास आवागमन करती हूं, ताकि सभी सैंपल की समय पर जांच कर सकें। लक्षण कम दिखने के कारण हमें काफी दिक्कत आ रही है। लोगों के लक्षण न होने के कारण वे जांच समय पर नहीं करा रहे। - डॉ. अनीता, रिसर्च वैज्ञानिक, कोविड-19 लैब में कार्यरत।