बालसमंद। हिसार जिले के चार स्थानों पर लगाए गए पंपसेट्स के जरिए ड्रेन का गंदा और सीवरेज युक्त पानी नहरों में मिलाया जा रहा है, जो हिसार और भिवानी जिले के 100 से अधिक गांवों के जलघरों से होते हुए लोगों के घरों तक पहुंच रहा है। यह मामला सामने आने के बाद बालसमंद क्षेत्र के किसान संगठनों ने इसका कड़ा विरोध किया है और इस जहरीले पानी की सप्लाई को बंद करवाने की मांग उठाई है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार चौधरी माइनर, देवसर फीडर, सरसाना माइनर और सिवानी फीडर में गंदा पानी नहरी जल में मिलाया जा रहा है। सोमवार को नहरबंदी के बाद जैसे ही पानी छोड़ा गया, तो किसानों ने पाया कि उसमें ड्रेन का गंदा पानी भी मिला हुआ है। किसानों का आरोप है कि यह पानी सीधे 100 से अधिक गांवों के जलघरों तक पहुंच रहा है और ग्रामीणों को यही दूषित पानी पीने को मिल रहा है। इससे गंभीर स्वास्थ्य संकट खड़ा हो गया है।
किसान संघर्ष समिति के प्रधान सुरेंद्र आर्य ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर कई बार सिंचाई विभाग से बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन विभाग ने बार-बार विरोध के बावजूद पंपसेट लगाकर ड्रेन का गंदा पानी नहरों में डाल दिया। किसानों ने स्वयं पंपों को बंद कर आपत्ति दर्ज कराई।
अधिकारियों की नदारदी, उपायुक्त से मिलकर की कार्रवाई
किसान नेता सुरेंद्र आर्य, उपाध्यक्ष विजय भांबू, कोषाध्यक्ष सतबीर गढ़वाल और महासचिव सतबीर पूनिया मंगलवार को सिंचाई विभाग के हिसार कार्यालय पहुंचे, लेकिन उन्हें जेई, एसडीओ, अधीक्षण अभियंता और एसई कोई भी अधिकारी नहीं मिला। डेढ़ घंटे तक इंतजार के बाद किसान जिला उपायुक्त अनीश यादव से मिले और उनकी मौजूदगी में गंदा पानी डालने वाले पंपसेट को बंद करवाया।
पुराना है मामला, फिर दोहराई गई लापरवाही
यह मामला नया नहीं है। पिछले वर्ष भी सिंचाई विभाग ने ऐसा ही प्रयास किया था, तब भी किसानों ने विरोध कर इसे बंद करवाया था। समाचार पत्रों में भी यह खबर प्रमुखता से प्रकाशित हुई थी। इसके बावजूद इस बार फिर ड्रेन का गंदा पानी नहरों में मिलाया गया, जिससे ग्रामीणों में भारी रोष है।
दूषित पानी से कई गंभीर बीमारियों का खतरा
गंदा पानी पीने से हैजा, टाइफाइड, पेचिश, हेपेटाइटिस ए और ई, दस्त, उल्टी, पेट दर्द, जिआर्डिया और क्रिप्टोस्पोरिडियम जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। यह न केवल मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि जल स्रोतों और जलीय जीवन के लिए भी घातक साबित होता है।
- डॉ. सुभाष खतरेजा, सामान्य अस्पताल, हिसार