विपक्ष के 146 सांसदों के निलंबन के खिलाफ इंडिया गठबंधन की पार्टियों के कार्यकर्ताओं ने लघु सचिवालय के बाहर पूर्व केंद्रीय मंत्री जयप्रकाश जेपी के नेतृत्व में प्रदर्शन किया। कांग्रेस पदाधिकारियों ने कांग्रेस भवन से लघु सचिवालय तक पैदल मार्च का एलान किया था। लोकतंत्र को बचाने के लिए कांग्रेस कार्यकर्ता 800 मीटर का पैदल मार्च भी नहीं कर पाए। अधिकतर कांग्रेस कार्यकर्ता गाड़ियों में सवार होकर लघु सचिवालय पहुंचे। गेट के सामने प्रदर्शन करते समय भी दो गुटों में बंटे दिखाई दिए। कार्यकर्ता अपने-हाथों में विपक्षी सांसद निलंबित, लोकतंत्र निष्कासित, संसद बंदी और लोकतंत्र बचाओ जैसे संदेश लिखे पोस्टर व बैनर हाथों में थामे हुए थे।
लघु सचिवालय के बाहर संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री जयप्रकाश (जेपी) ने सरकार पर संसद में विपक्ष की आवाज कुचलने का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की। जेपी ने कहा, लोकतंत्र में बोलना व सवाल उठाना विपक्ष का अधिकार ही नहीं, जिम्मेदारी भी है। सत्ता के दम पर-सरकार जितना भी कुचलने की कोशिश करे, विपक्षी दल लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई हर कीमत पर लड़ेंगे। उन्होंने संसद की सुरक्षा में हुई सेंधमारी को लेकर पीएम और गृह मंत्री द्वारा सत्र के दौरान बाहर बयान देने को संसदीय विशेषाधिकार का उल्लंघन करार दिया और कहा कि दोनों बाहर बोलते रहे मगर सदन में नहीं आए। पूर्व आईएएस चंद्रप्रकाश जांगड़ा ने कहा कि संसद की सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा न करके ये सरकार सांसदों को संसद की सुरक्षा के मुद्दे पर सवाल पूछने पर 142 विपक्षी सांसदों को निलंबित करके पूरी दुनिया में भारत के लोकतंत्र को कलंकित किया। 13 दिसंबर 2001 में भारत की संसद पर आतंकी हमला हुआ तब भी भाजपा की सरकार थी।
युवा कांग्रेस नेता जस्सी पेटवाड़ ने कहा कि सरकार तानाशाही कर लोकतंत्र को खत्म करने की साजिश कर रही है। विपक्ष की गैर मौजूदगी में महत्वपूर्ण बिल रखे गए। भाजपा की लोकतंत्र के खात्मे की साजिश को कभी पूरा नहीं होने दिया जाएगा। कांग्रेस संसद से लेकर सड़क तक लडे़गी। इस मौके पर पूर्व मंत्री प्रो. संपत सिंह, राज्य प्रधान किसान सभा शमशेर सिंह नंबरदार, दिनेश सिवाच, शकुंतला जाखड़, लाल बहादुर खोवाल, स्नेहलता निंबल, पूर्व आईएएस चंद्र प्रकाश जांगड़ा, धर्मवीर गोयत, अनिल मान, हनुमान वर्मा, सुमन शर्मा, सुखबीर सिंह डूडी, बीर सिंह दलाल, पार्षद कर्मकेश कुंडू, पार्षद प्रतिनिधि मनोज टांक, एडवोकेट योगेश सिहाग, तेलुराम जांगड़ा, कमलेश रंगा आदि उपस्थित रहे।