हिसार। जिले के 507 राजकीय प्राथमिक विद्यालय में पढ़ रहे विद्यार्थी अब रंगीन ईवा फ्लोर मैट पर बैठकर पढ़ाई करते नजर आएंगे। इन मैटों पर क-ख-ग अक्षर लिखे होंगे। खास बात है कि इन मैटों का न तो भीगने का डर रहेगा और न ही इनमें से धूल उड़ेगी। जबकि सामान्य दरी पर अगर एक या दो बूंद पानी भी लग जाएं तो वह नमी के कारण पूरा गीला हो जाता था। जिस कारण एक भी विद्यार्थी दरी पर नहीं बैठ पाते थे। साथ ही दरी में काफी मात्रा में धूल जमा हो जाता था, जिसके कण विद्यार्थियों की श्वास नली के माध्यम से शरीर के अंदर प्रवेश कर जाते थे, जिससे विद्यार्थियों को एलर्जी से ग्रस्त होने का भय बना रहता था।
बैंच की कमी से जूझ रहे स्कूलों को मिलेगी प्राथमिकता
जिन सरकारी स्कूलों में बैंच की कमी है उन स्कूलों को मुख्यालय की ओर से प्राथमिकता दी जाएगी। कारण यह है कि अभिभावकों-एसएमसी व शिक्षकों की ओर से बार-बार बैंचों की मांग भेजी जा रही थी। जिस पर मुख्यालय की ओर से मेंटेनेंस करवाकर कुछ बैंचों को तो दुरुस्त करवाया था लेकिन विद्यार्थियों की संख्या की तुलना में ये कम निकले।
परीक्षा व विशेष कार्यक्रमों में होता है दरी का इस्तेमाल
स्कूलों में दरी का इस्तेमाल अधिकतर परीक्षा व विशेष कार्यक्रमों में किया जाता है। क्योंकि विद्यार्थियों की संख्या काफी होने के कारण हर जगह बैंच नहीं ले जा सकते हैं। जिस कारण दरी का इस्तेमाल किया जाता है।
- राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में ईवा फ्लोर मैट भेजे जाएंगे। कुछ जिले में तो पहुंचा भी दिए हैं, जबकि कुछ में शेष है। जिन स्कूलों में बैंच की कमी है उन स्कूलों को प्राथमिक चरण में उपरोक्त मैट भेजे जाएंगे। पहले फेज में स्कूलों की सूची मांगी है, जिनमें ये मैट पहुंचाए जाएंगे।
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आरएस ढिल्लो, मौलिक शिक्षा निदेशक, शिक्षा निदेशालय, पंचकूला।