सीएम और विधायक डॉ. कमल गुप्ता के ड्रीम प्रोजेक्ट एयरपोर्ट को बेशक 2 से 5 सितंबर के बीच शुरू करने की बात की जा रही है, लेकिन नियमों और कानून को ताक पर रखकर ये जहाज अधिक समय तक नहीं उड़ाए जा सकेंगे। इसका कारण ये है कि अभी तक एयरपोर्ट अथॉरिटी ने न तो पॉल्यूशन बोर्ड से एनओसी ली है और न ही एनवायरनमेंट क्लीयरेंस, जो कि अनिवार्य है। अगर अगले महीने किसी तरह से जहाज उड़ाए भी गए तो तय है कि नियमों के अनुसार कुछ नोटिस देने और अन्य कार्रवाई के बाद पॉल्यूशन बोर्ड को एयरपोर्ट को सील करना पड़ेगा। ऐसे में अगर बिना एनओसी और बिना एनवायरनमेंट क्लीयरेंस के जहाज उड़ता है तो संभावना है कि चुनाव के बाद अगले एक साल में ये उड़ानें बंद हो जाएंगी।
अब तक क्यों नहीं ली एनओसी
सीएम ने 2014 में एयरपोर्ट की घोषणा की थी। 2015 में एयरपोर्ट शुरू करने को लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू हो गई थी, लेकिन अधिकारियों ने अब तक पॉल्यूशन बोर्ड और केंद्र सरकार के पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से एनवायरनमेंट क्लीयरेंस ही नहीं ली। ऐसे में सवाल उठता है कि सरकार और अधिकारियों की एयरपोर्ट शुरू करने की मंशा है या वे सिर्फ जनता को गुमराह कर रहे हैं।
इसलिए जरूरी है एनवायरनमेंट क्लीयरेंस
वर्ष 2006 में पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर एनवायरनमेंट इंपेक्ट असेसमेंट अथॉरिटी का गठन किया गया था। इस अथॉरिटी का काम बड़े प्रोजेक्ट से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन करना है। यह अथॉरिटी सामाजिक, आर्थिक प्रभाव का भी आकलन करती है। एयरपोर्ट जैसे बड़े प्रोजेक्ट के मामले में आम जनता की भी राय भी ली जाती है। ऐसे कई स्तरों की जांच के बाद पर्यावरण अनुमति मिलती है, ताकि आम जनता और सामाजिक हितों का नुकसान न हो।
पॉल्यूशन की रेड कैटेगरी में है एयरपोर्ट
किसी भी तरह के प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड से एनओसी लेनी जरूरी होती है। इसके लिए पॉल्यूशन बोर्ड की तीन कैटेगरी होती हैं - रेड, ऑरेंज और ग्रीन। सबसे अधिक पॉल्यूशन फैलाने वाले प्रोजेक्ट रेड कैटेगरी में आते हैं और एयरपोर्ट, थर्मल प्लांट, ऑटोमोबाइल सेक्टर आदि इसमें शामिल होते हैं। ऐसे में पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की एनओसी लेना बेहद अनिवार्य है। ऑरेंज कैटेगरी में रेड से अपेक्षाकृत कम पॉल्यूशन फैलाने वाले जैसे गत्ता मिल, प्लाइवुड फैक्टरी, निर्माण आदि के प्रोजेक्ट शामिल हैं। वहीं ग्रीन कैटेगरी में सबसे कम पॉल्यूशन फैलाने वाले जैसे बायो फर्टिलाइजर, आयुर्वेदिक व होम्योपैथी दवाइयां बनाने, चिलिंग प्लांट आदि को शामिल किया जाता है।
पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड देगा दो तरह की एनओसी
एयरपोर्ट अॅथारिटी को पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड से दो तरह की एनओसी लेनी होगी। पहली सभी तरह के निर्माण कार्य की और फिर एयरपोर्ट शुरू करने की। इस एनओसी की जरूरत इसलिए होती है, क्योंकि एयरपोर्ट पर भारी मात्रा वायु और ध्वनि के अलावा वेस्ट पॉल्यूशन होता है।
सीएम का दो जुलाई को हिसार में कार्यक्रम है। ऐसे में चर्चा है कि वे एयरपोर्ट आएंगे, लेकिन हमारे पास औपचारिक रूप से सीएम का कोई प्रोग्राम नहीं आया है। विंग कमांडर बोर्ड से एनओसी और मंत्रालय से एनवायरनमेंट क्लीयरेंस के बारे में जानकारी नहीं है। प्रोजेक्ट डायरेक्टर चंडीगढ़ में बैठते हैं, यह सब वहीं से होगा।
- एसएस बधवार, विंग कमांडर एयरपोर्ट डायरेक्टर।
हमसे एनओसी लेना जरूरी है, लेकिन हमारे पास अब तक एयरपोर्ट अथॉरिटी की और से एनओसी लेने के लिए कोई एप्लीकेशन नहीं आई है। अगर बिना एनओसी के एयरपोर्ट चलता है या कोई निर्माण भी होता है तो हम एक्ट के अनुसार सभी जरूरी कार्रवाई करेंगे।
- राकेश भौंसले, क्षेत्रीय अधिकारी, पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड।
तीन सितंबर को सुबह आठ बजे हिसार एयरपोर्ट का उद्घाटन मुख्यमंत्री करेंगे। जहां तक एनवायरनमेंट क्लीयरेंस और पॉल्यूशन बोर्ड से एनओसी की बात है, उसकी फेस-2 और फेस-3 में जरूरत पड़ेगी। बाद में उसे ले लिया जाएगा।
- अशोक कुमार मीणा, डीसी, हिसार।