सीएम मनोहरलाल ने पूछा है कि आखिर सेंट्रल जेल की जमीन किस आधार पर एक निजी अस्पताल को दे दी गई। इस बारे में सीएम ने पूरा रिकॉर्ड तलब किया है। रिकॉर्ड तलब करने से कई विभागों में हड़कंप मच गया है। अधिकारी करीब तीन दशक पुरानी फाइलों को खोजने में जुटे हैं।
दरअसल करीब तीन दशक पहले पूर्व सीएम चौधरी भजनलाल के समय एक अस्पताल के लिए जमीन दी गई थी। डाबड़ा चौक के करीब रेलवे लाइन के पास सेंट्रल जेल की जमीन अस्पताल के लिए प्रदान की गई थी। उस समय यहां रेलवे फाटक होता था। अब सीएम मनोहरलाल ने इस बारे में पूरा रिकॉर्ड तलब किया है।
पूर्व सीएम का रखा उदाहरण तो खटक गई बात
बताया जा रहा है कि एक चिकित्सक सीएम के पास किसी विभाग की जमीन अस्पताल के लिए अलॉट करने की मांग को लेकर पहुंच गया था। सीएम मनोहरलाल ने नियमों का हवाला देते हुए इनकार कर दिया। सीएम ने कहा कि कोई भी सीएम किसी को जमीन अलॉट नहीं कर सकता। उक्त चिकित्सक ने हिसार का उदाहरण सीएम के सामने रख दिया। सीएम से मिलने गए इस चिकित्सक ने कहा कि पूर्व सीएम भजनलाल के समय में सेंट्रल जेल की जमीन निजी अस्पताल के लिए दी गई थी। सीएम मनोहरलाल को यह बात खटक गई, जिसके बाद उन्होंने इस बारे में पूरा रिकॉर्ड तलब किया है।
सेंट्रल जेल के अधिकारी रिकॉर्ड जुटाने में जुटे
सीएम के आदेश के बाद डीजी जेल ने हिसार सेंट्रल जेल के अधिकारियों का इस बारे में पूरा केस रखने का आदेश दिया। डीजी जेल के आदेश मिलने के बाद सेंट्रल जेल के अधिकारी इस बारे में रिकॉर्ड जुटाने का प्रयास कर रहे हैं। जेल के अधिकारियों ने इस बारे में राजस्व विभाग से भी ब्योरा मांगा है। सरकारी महकमों में तीन दशक पुरानी फाइलों को खोजने के लिए हड़कंप मचा हुआ है। डाबड़ा चौक रेलवे ओवर ब्रिज को फोरलेन करने में सरकारी विभागों के अलावा इस अस्पताल की कुछ जमीन की जरूरत भी थी। बाद में अधिकारियों ने इस आरओबी के डिजाइन में ही बदलाव कर दिया था।
सरकार की ओर से पत्र आया है, जिसमें वर्मा अस्पताल को सेंट्रल जेल की जमीन देने के बारे में जानकारी मांगी गई है। इस बारे में विभागों से रिकॉर्ड तलब किया है। जल्द ही पूरी रिपोर्ट बनाकर प्रदेश सरकार को भेज देंगे।
- ब्रह्मजीत अहलावत, डीआरओ, हिसार