हिसार। केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान (सीआईआरबी) के वैज्ञानिकों ने भैंसों के लिए विशेष फीड एडिटिव रेजमी (रूमेन इको सिस्टम स्टिमुलेंट मीथेन इनीवीटर) तैयार किया है। इसे खिलाने से न केवल मुंह और गोबर के जरिए मीथेन गैस का उत्सर्जन कम होगा, बल्कि दूध उत्पादन भी बढ़ेगी। फिलहाल संस्थान इस फीड एडिटिव को पशुपालकों तक पहुंचाने के लिए कंपनियों के साथ समझौता करने की तैयारी कर रहा है।
संस्थान के वैज्ञानिकों ने बताया कि पशु के शरीर में फायदेमंंद व हानिकारक दोनों तरह के कीटाणु होते हैं। फायदेमंद कीटाणु खाने को पचाते हैं, जबकि हानिकारक कीटाणु मीथेन गैस बनाते हैं। पाचन क्रिया के दौरान हाईड्रोजन गैस कार्बनडाइऑक्साइड के साथ मिलकर मीथेन गैस बनाती है। यह पशु के मुंह व गोबर के जरिये शरीर से बाहर निकलती है। करीब 90 प्रतिशत गैस मुंह और 10 प्रतिशत उत्सर्जन गोबर के जरिये होता है। संस्थान के वैज्ञानिकों के अनुसार फीड एडिटिव के माध्यम से भैंस की पाचन प्रक्रिया में बदलाव किया। इससे भोजन से मिलने वाले पोषक तत्वों में किसी तरह की कमी नहीं आई। इस एडिटिव ने सिर्फ पशु द्वारा उत्सर्जित मीथेन गैस की मात्रा को 30 प्रतिशत तक कम किया।
3 साल पहले मिला पेटेंट
वैज्ञानिकों के मुताबिक वर्ष 2022 में इस तकनीक को पेटेंट करवाया था। इसके बाद 2024 में आईसीएआर ने इस तकनीक को मान्यता दी। यह फीड एडिटिव मीथेन उत्सर्जन 30 प्रतिशत तक कम करने के साथ-साथ दूध उत्पादन में 10 से 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी करेगा। भैंस अनुसंधान केंद्र ने यह फीड एडिटिव तैयार किया है, लेकिन व्यवसायीकरण का अधिकार आईसीएआर के संगठन एग्री इनोवेट के पास है।
भैसों के लिए विशेष सप्लीमेंट बनाना 10 वर्षों की मेहनत का परिणाम है। पर्यावरण व पशुपालक दोनों के लिहाज से यह एडिटिव उपयोगी साबित होगा। जल्द ही इसका व्यवसायीकरण किया जाएगा।
- डॉ. अभिजित दे, विभागाध्यक्ष, पशु पोषण एवं खाद्य प्रौद्योगिकी, केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान