हिसार। किशोर अवस्था में बच्चे भावनात्मक रूप से कमजोर होते हैं। ऐसे में अभिभावकों और शिक्षकों दोनों को उन पर नजर रखने की जरूरत होती है। इस उम्र में उनका ध्यान नहीं रखा गया तो वे भटक सकते हं और इस तरह की घटना को अंजाम दे सकते हैं। मोबाइल की लत भी घातक होती जा रही है। यह कहना है नागरिक अस्पताल की मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. पूनम दहिया का।
शहर के निजी स्कूल में सहपाठी द्वारा छात्र को कैंची मारने के मामले में उनका कहना है कि किशोर अवस्था में बच्चे छोटी बात को मन में रख लेते हैं, ऐसे में बदलें की भावना कहीं न कहीं रह जाती है। उस कारण ऐसा करते है। दूसरा कारण ये है कि आजकल के बच्चे मोबाइल फोन में व्यस्त रहते हैं और अधिकतर समय में वे मारधाड़ वाले खेल खेलते हैं। ऐसे में बच्चों के दिमाग में लड़ाई-झगड़ा करने की प्रवृति बनी शुरू हो जाती है जो कि काफी घातक है। इसके अलावा आज के समय में बच्चे घर के बाहर आपस में मिलजुल कर कम खेल खेलते हैं और मोबाइल फोन पर ही बने रहते हैं। दूसरा अगर, कुछ करें तो वे सहन नहीं कर सकते। ऐसे बच्चों के स्वभाव में चिड़चड़ापन भी आता जाता है वो छोटी छोटी बातों पर लड़ाई झगड़ा करना शुरू कर देता है।
चिकित्सक का कहना है कि घर के अंदर अभिभावकों को शुरू से ही ऐसा माहौल बनाना चाहिए कि अगर बच्चों के साथ कुछ भी हो तो वह बातें साझा करें। अगर, इस मामले में बच्चा अपने घर पर बातें शेयर करता तो ऐसा नहीं होता। शिक्षकों को भी कक्षा के अंदर बच्चों पर ध्यान रखना चाहिए। किसी विद्यार्थी की गतिविधि सहीं नहीं लगती है तो इस बारे में अभिभावकों से बात करें और उसकी कांउसिलिंग करवाएं। अभिभावक बच्चों को शुरू से ये समझाए कि मजाक हलका फुलका ही हो, जो किसी को नुकसान न पहुंचाए। कई बार मजाक-मजाक में बड़े हादसे हो जाते हैं।
नैतिक शिक्षा के बारे में विद्यार्थियों को करें जागरूक
अगर किसी स्कूल के छात्र स्कूल कैंपस में ही इस प्रकार की वारदात कर देते हैं तो इसमें कहीं न कहीं उस स्कूल प्रबंधन व शिक्षकों की भी कमी रही होगी। छात्र द्वारा स्कूल में की जाने वाली हरकतों के बारे में उसके अभिभावकों को भी बताना चाहिए। वहीं अभिभावकों को भी अपने बच्चों का ध्यान रखना चाहिए। बच्चों को बुरी संगत से बचाने के लिए उसको मोटिवेट करना चाहिए। भविष्य में ऐसी हरकत न हो इसके लिए स्कूलों में नैतिक शिक्षा पर जोर देना चाहिए। समय-समय पर विद्यार्थियों की काउंसिलिंग होनी चाहिए। लड़ाई-झगड़ा करने व आपसी मेल जोल से रहने के लिए सभी को प्रेरित करना चाहिए। - धनपत राम, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, हिसार।