हिसार। शहर को बेसहारा पशु मुक्त करने का अभियान ठंडा पड़ने से सड़कों पर फिर से पहले जैसे ही हालात नजर आने लगे हैं। गायों व नंदियों को पकड़ने का अभियान तीन माह से बंद है। नतीजतन सड़कों, मुख्य चौराहों और गलियों में पशुओं के जमावड़े से राहगीरों को चोटिल होने का खतरा बना रहता है।
करीब तीन माह पहले तक नगर निगम नियमित रूप से बेसहारा पशुओं को पकड़ रहा था। इसी दौरान गो सेवा आयोग ने अभियान को स्वयं चलाने की बात कही जिसके बाद निगम ने अपने स्तर पर पशु पकड़ना बंद कर दिया। अब आयोग ने गायों को पकड़ने से मना कर दिया और निगम को पत्र भेजकर निर्देश दिए हैं कि सिर्फ नंदियों को ही पकड़ा जाए।
नंदी पकड़ने का अभियान भी बंद पड़ा
गो सेवा आयोग के नए आदेशों के बाद निगम ने कुछ दिन नंदी पकड़े लेकिन अब यह कार्रवाई भी पूरी तरह बंद है। अधिकारियों का तर्क है कि ढंढूर स्थित गो-अभयारण्य में फिलहाल टीकाकरण अभियान चल रहा है जिसके कारण नए पशुओं को वहां शिफ्ट नहीं किया जा रहा है। पशु पकड़ो अभियान बंद होने का नतीजा यह है कि शहर में सुबह-शाम जगह-जगह बेसहारा पशुओं के झुंड दिखाई देने लगे हैं। पशुपालक भी बेखौफ होकर दूध निकालने के बाद अपने पशुओं को सड़कों पर छोड़ रहे हैं।
पशुपालक बेखौफ, सड़कों पर 3 हजार पशु
अभियान बंद होने से शहरवासी परेशान हैं। पशुपालक भी दूध निकालने के बाद गायों को सड़कों पर छोड़ रहे हैं। पशुपालन विभाग के अनुसार, इस समय शहर की सड़कों पर 3,000 से अधिक बेसहारा पशु घूम रहे हैं। मच्छरों से बचने के लिए सड़कों के बीचोबीच आकर बैठ जाते हैं जिससे रात के समय हादसों की आशंका बनी रहती है।
गोवंश मुक्त नहीं हो सका हिसार
गो सेवा आयोग का शहर को बेसहारा पशु मुक्त बनाने का वादा आज तक पूरा नहीं हो सका। नवंबर 2024 में आयोग के चेयरमैन श्रवण कुमार गर्ग ने अधिकारियों के साथ बैठक कर कहा था कि प्रदेश को गोवंश मुक्त बनाने के लिए अंतिम अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत हिसार को सबसे पहले गोवंश मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन आज तक यह लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सका है।
गोवंश को पकड़ने का अभियान किस कारण से बंद है, इस बारे में अधिकारियों से जानकारी ली जाएगी। मैं अभियान को लेकर गो सेवा आयोग के चेयरमैन से भी बात करूंगा कि किस तरह प्रभावी रणनीति बनाई जाए ताकि शहरवासियों को इस समस्या से निजात मिल सके। - प्रवीण पोपली, मेयर