हिसार। गैस की किल्लत के कारण छोटे दुकानदारों पर दोहरा बोझ बढ़ गया है। गैस महंगी मिल रही है जिससे खाना बनाने पर खर्च बढ़ गया है लेकिन दूसरी ओर रेट बढ़ाना भी मुश्किल हो गया है। बड़े दुकानदार या होटल संचालक भले ही रेट बढ़ा रहे हैं लेकिन छोटे दुकानदारों के लिए ऐसा करना मुमकिन नहीं है। पहले दो-तीन हजार रुपये की बिक्री पर 500-700 रुपये की बचत हो जाती थी लेकिन अब यह बचत घटकर बहुत कम हो गई है और खुद का खर्च और लेबर का खर्च भी मुश्किल हो गया है।
जिले में पिछले 15 दिन से एलपीजी गैस की किल्लत चल रही है। घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये का इजाफा किया गया है और अब गैस मिल ही नहीं पा रही है। दुकानदारों को अब गैस सिलेंडर ब्लैक में दो गुना कीमत पर खरीदने पड़ रहे हैं। रेहड़ी पर छोले-भटूरे, समोसे, कुलचे और ब्रेड पकौड़े बेचने वालों को पुराने रेट पर ही सामान बेचना पड़ रहा है। बाजार के इन छोटे दुकानदारों ने अपनी पीड़ा बयान करते हुए कहा कि बड़े होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को ज्यादा फर्क नहीं पड़ता लेकिन छोटे दुकानदारों को काफी परेशानी हो रही है।
-
पहले बचत हो जाती थी, अब नहीं
पहले एक दिन में एक हजार से 800 रुपये तक की बचत हो जाती थी लेकिन अब महंगे गैस सिलेंडर के कारण बचत नहीं हो पाती। छोले-भटूरे की प्लेट 50 रुपये की देते थे आज भी वही रेट है जबकि गैस सिलेंडर का रेट बढ़ गया है। दो हजार रुपये का सिलेंडर मुश्किल से लेकर आ रहे हैं और जो बचत होती थी वह सिलेंडर खरीदने में पूरी हो जाती है।
- दिनेश कुमार, छोले भटूरे दुकान संचालक।
बचत अब सिलेंडर में ही जा रही
गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है जिससे काफी समस्या हो रही है। सस्ते गैस सिलेंडर के लिए पड़ोसियों की गैस कॉपी लेकर धक्के खा रहे हैं। एक गैस सिलेंडर दुकान पर दो या तीन दिन चलता है। दो गुना रेट पर गैस सिलेंडर लेकर दुकानदारी तो चला रहे हैं लेकिन बचत कुछ नहीं हो रही। मन करता है कि दुकान कुछ दिनों के लिए बंद कर दूं क्योंकि बचत अब सिलेंडर खरीदने में ही चली जाती है।
- सोनू कुमार, नान विक्रेता।
आधा दिन ही लगा पा रहे रेहड़ी
गैस न होने पर आधा दिन ही रेहड़ी लगाते हैं जिससे ग्राहक वापस चले जा रहे हैं। अगर ऐसा चलता रहा तो काम बंद करना पड़ेगा। गैस किल्लत ने मुझे बेरोजगार बना दिया है। नान और छोले-भटूरे के काम से घर चलता था अब घर चलाना भी मुश्किल हो गया है। माल बनाने का खर्च बढ़ गया है लेकिन फिर भी नान और छोले की प्लेट 60 रुपये की ही दे रहे हैं। इससे अधिक रेट कोई देने को तैयार नहीं होता है।
- धर्मेंद्र, छोले-भटूरे विक्रेता।