चार वर्षों से जिले के सरकारी स्कूलों को एनएसएस शिविर का बजट नहीं मिल रहा है। इस कारण शिक्षक या तो चंदा कर या फिर अपनी जेबें ढीली कर एनएसएस शिविर लगवा रहे हैं। खास बात यह है कि इन चार वर्षों में शिक्षा निदेशालय ने स्वयंसेवकों के लिए रिफ्रेशमेंट तक का बजट भी जारी नहीं किया।
जिले के सरकारी व निजी स्कूलों में कुल मिलाकर 60 यूनिट हैं, जिनको बीते चार साल में कुल सात करोड़ 20 लाख रुपये का बजट शिक्षा निदेशालय की ओर से मिलना था, लेकिन नहीं मिला। स्थिति यह है कि प्रत्येक स्कूल के एनएसएस प्रभारी स्टाफ व अन्य लोगों की मदद से राशि एकत्रित कर एनएसएस शिविर लगवा रहे हैं। हाल ही में पटेल नगर स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में 10 से 16 मार्च तक एनएसएस शिविर लगाया गया। इसके आयोजन के लिए शिक्षकों ने कुल 7250 रुपये का चंदा एकत्रित किया। स्कूल स्तर पर शुरू हुए इस एनएसएस शिविर में दो इकाइयों के कुल 108 स्वयंसेवकों ने भाग लिया। शिक्षकों द्वारा एकत्रित की गई चंदे की राशि को स्वयंसेवकों की रिफ्रेशमेंट और अन्य गतिविधियों पर खर्च किया गया।
एक वर्ष में मिलता है एक करोड़ 80 लाख रुपये का बजट
जिले के सरकारी व निजी स्कूलों में कुल 60 एनएसएस (राष्ट्रीय सेवा योजना) इकाइयां हैं। इन्हें एक साल में जिला स्तर पर कुल एक करोड़ 80 लाख रुपये का बजट मिलता है। प्रत्येक यूनिट की बात करें तो कुल 46500 रुपये का बजट जारी किया जाता है, जिनमें रेगुलर गतिविधियों के लिए 24000 रुपये व डे-नाइट गतिविधियों के लिए 22500 रुपये का बजट दिया जाता है।
शिक्षा निदेशालय ने मंगवाई रसीदें, फिर भी बजट नहीं किया जारी
शिक्षकों के अनुसार शिक्षा निदेशालय की ओर से एनएसएस शिविर की गतिविधियों पर खर्च की गई राशि की रसीदें मंगवाई गई थीं। शिक्षकों के अनुसार शिक्षा निदेशालय द्वारा राशि देने की बात कही गई, लेकिन अभी तक बजट जारी नहीं किया गया।
कई बार बजट के लिए शिक्षा निदेशालय को पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन अब तक बजट नहीं मिला है। एक बार फिर रिमांडर भेजा जाएगा।
- नरेंद्र दूहन, जिला समन्वयक, राष्ट्रीय सेवा योजना।