बरवाला-जींद मार्ग पर पनिहारी के खूनी मोड़ पर मंगलवार देर रात जींद मिल्क प्लांट के एक कैंटर और डस्टर गाड़ी के बीच भीषण टक्कर होने से तीन युवकों की मौत हो गई और एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। इस हादसे में गांव पनिहारी के 27 वर्षीय राजेंद्र कुमार, कुनबे में उसके भतीजे 28 वर्षीय अशोक कुमार और 26 वर्षीय सीताराम की मौत हो गई, जबकि सुनील कुमार गंभीर रूप से घायल हो गया।
गांव पनिहारी के राजेंद्र, अशोक और सीताराम हमउम्र थे और उनमें गहरी दोस्ती थी। वे मंगलवार रात सुनील के साथ डस्टर गाड़ी में गांव खेड़ी से पनिहारी लौट रहे थे। गाड़ी राजेंद्र चला रहा था। वे जब पनिहारी मोड़ पर पहुंचे तो डस्टर गाड़ी और जींद मिल्क प्लांट के एक कैंटर की आमने-सामने की जोरदार टक्कर हो गई। हादसे में राजेंद्र, अशोक और सीताराम की मौत हो गई और सुनील घायल हो गया। सूचना मिलने पर बरवाला थाने से एएसआई महेंद्र कुमार की टीम मौके पर पहुंची। सरकारी अस्पताल से एंबुलेंस घटनास्थल पर पहुंची। शवों को बड़ी मुश्किल से कार से बाहर निकाला गया। तीनों युवकों के शवों का पोस्टमार्टम बुधवार को यहां नागरिक अस्पताल में किया गया। गंभीर रूप से घायल सुनील एक निजी अस्पताल में दाखिल है। हादसे के बाद चालक कैंटर छोड़कर फरार हो गया। बरवाला थाना एसएचओ प्रह्लाद सिंह ने बताया कि कैंटर चालक के खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने का केस दर्ज किया है।
घने पेड़ों के कारण हुआ हादसा
पनिहारी के वीरू ने बताया कि बरवाला-जींद मार्ग पर पनिहारी मोड़ घने पेड़ों के कारण खूनी मोड़ बना हुआ है। ग्रामीण वन विभाग को इन पेड़ों को काटने का एक सप्ताह का अल्टीमेटम देते हैं। यदि एक सप्ताह में वन विभाग ने ये पेड़ न काटे तो ग्रामीण खुद पेड़ काट देंगे, जिसकी सारी जिम्मेवारी वन विभाग की होगी। उन्होंने बताया कि घने पेड़ों के कारण दोनों तरफ के वाहनों के चालकों को सामने से वाहन आने का आभास नहीं होता। पेड़ों के कारण चालक को दूसरा वाहन नहीं दिखता। मोड़ पर अचानक दूसरा वाहन सामने आने से चालक गाड़ी पर नियंत्रण नहीं कर पाते और टक्कर हो जाती है। उन्होंने बताया कि इसी वजह से कुछ अरसे पहले उसी जगह हादसा होने से एक दंपति की मौत हो गई थी। थोड़े ही समय में खूनी मोड़ पर हादसों में कई लोग जान गंवा चुके हैं।
इकलौता बेटा था अशोक
तीनों मृतकों में से अशोक कुमार परिवार का इकलौता बेटा था। उसकी एक छोटी बहन है। वह 12वीं पास था और चार बच्चों का पिता था। ग्रेजुएट राजेंद्र एक लड़के और एक लड़की का पिता था। तीसरा मृतक सीताराम प्रजापति अविवाहित था और वह 10वीं पास था। वे तीनों खेती करते थे। सीताराम मंगलवार को दिन में दोस्तों के साथ रिश्तेदारी में बहबलपुर गांव में आया था। उसने बाद में बरवाला में शॉपिंग की थी, एक रिश्तेदारी में शादी है। वे रात को खेड़ी से डस्टर गाड़ी में गांव लौट रहे थे।
गांव में मातम का रहा माहौल
हादसे में तीन युवकों के मारे जाने से बुधवार को गांव पनिहारी में माहौल गमगीन बना रहा। हादसे के कारण गांव के ज्यादातर घरों में चूल्हे नहीं जले। शव पहुंचने पर तीनों परिवारों की महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल था। उनके रोने की आवाजें दूर तक जा रही थीं। थोड़े-थोड़े अंतराल के बाद युवकों के शव श्मशानघाट ले जाए गए और अंतिम संस्कार किया गया। शव घर से उठने के बाद परिवार की महिलाओं का विलाप करना कुछ कम हुआ। दूसरे परिवारों की महिलाओं ने मारे गए युवकों के परिवारों की महिलाओं का ढांढस बंधाया।