हांसी। हांसी विधानसभा सीट पर हर बार रोमांचक मुकाबला होत रहा है। इस बार भाजपा, जहां विकास कार्यों को लेकर मैदान में है, वहीं जातिगत समीकरणों से जीत की उम्मीद तलाश रही है। भाजपा ने पंजाबी कार्ड खेलकर मौजूदा विधायक विनोद भयाना पर फिर से दांव लगाया है, जबकि कांग्रेस पंजाबी, वैश्य, जाट चेहरे को लेकर चुनावी नैया पार करने की उधेड़बुन में हैं। ऐसे में भयाना को जीत के लिए कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
भाजपा भले ही विकास की बात करती है, लेकिन हांसी को जिला बनाने की मांग इस कार्यकाल में भी पूरी नहीं कर पाई। हालांकि पुलिस जिला भाजपा की सरकार में ही बनाया गया था। हांसी को जिला बनाने की मांग 11 वर्ष से की जा रही है। विधायक विनोद भयाना ने इसे प्रमुखता से बड़े मंचों पर उठाया है। तीन बार विधानसभा में भी आवाज उठाई। उनकी खुद की इच्छा थी कि उनके कार्यकाल में हांसी जिला बने, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। बीती 17 अगस्त को सीएम की रैली में जिला बनाने की उम्मीद थी, लेकिन एक दिन पहले आचार संहिता लग गई। हालांकि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सरकार बनी तो हांसी को जिला बनाएंगे। मतगणना के अगले दिन यहां डीसी बैठाएंगे। जिला बनाने के अलावा, बेसहारा पशु, सफाई व्यवस्था, बेरोजगारी, नगर परिषद का एनडीसी पोर्टल जैसे मुद्दे चर्चा में है। बीते पांच वर्ष में नागरिक अस्पताल में भी कोई खास सुधार देखने को नहीं मिला।
जाट बहुल इलाके में गैर जाट विधायकों का दबदबा
हांसी जाट बहुल विधानसभा सीट है। हालांकि शहर में पंजाबी समाज की बड़ी आबादी है। हलके में आज तक केवल एक बार ही जाट विधायक बना है। दानवीर सेठ छाजुराम के पौते पीके चौधरी 1987 में भाजपा से विधायक बने थे। यह पहली बार था जब यहां से भाजपा व जाट प्रत्याशी का खाता खुला। पीके चौधरी के बाद कोई भी जाट नेता इस सीट से जीत दर्ज नहीं कर पाया। हांसी से अब तक पांच बार पंजाबी, तीन बार सैनी व दो बार वैश्य समाज से विधायक बने हैं।
15 वर्ष से कांग्रेस का नहीं बना विधायक
कांग्रेस से तीन, भाजपा से दो बार विधायक बने हैं। क्षेत्रीय दलों की बात करें तो हजकां से दो बार, इनेलो व हविपा से एक-एक विधायक चुने गए। दो बार यह सीट निर्दलीय उम्मीदवार के हाथ आई। इस चुनाव में भाजपा लगातार दूसरी बार वापसी के मूड में है, वहीं कांग्रेस बीते 19 वर्षों का सूखा खत्म करना चाहती है। वर्ष 2005 में कांग्रेस से अमीर चंद मक्कड़ विधायक बने थे।
कांग्रेस में टिकटार्थियों की लंबी फेहरस्ति
कांग्रेस ने अभी पत्ते नहीं खोले हैं। इस सीट से 44 नेता टिकट के लिए कतार में है। बीते चुनाव में दूसरे व तीसरे नंबर पर रहने वाले प्रत्याशी इस समय कांग्रेस में हैं। क्षेत्रीय पार्टियों से विधायक व मंत्री रह चुके पूर्व मंत्री सुभाष गोयल, पूर्व मंत्री अतर सिंह सैनी भी कांग्रेस से टिकट की आस लगाए बैठे हैं।
2019 का विधानसभा चुनाव
पार्टी उम्मीदवार वोट
भाजपा विनोद भयाना 53191
जजपा रविंद्र मक्कड़ 30931
निर्दलीय प्रेम मलिक 21639
अब तक बन चुके विधायक
वर्ष पार्टी नाम
1967 कांग्रेस हरिराम सैनी
1968 कांग्रेस हरिराम सैनी
1972 निर्दलीय ईश्वर सिंह सैनी
1977 जनता पार्टी बलवंत तायल
1982 लोकदल अमीर चंद मक्कड़
1987 भाजपा पीके चौधरी
1991 निर्दलीय अमीर चंद मक्कड़
1996 हविपा अतर सिंह सैनी
2000 इनेलो सुभाष गोयल
2005 कांग्रेस अमीर चंद मक्कड़
2009 हजकां विनोद भयाना
2014 हजकां रेणुका बिश्नोई
2019 भाजपा विनोद भयाना