गो अभयारण्य के बाद नंदीशाला में नंदियों की बदहाल अवस्था की पोल खुलते ही मंगलवार को निगम प्रशासन हरकत में आया। निगम अधिकारियों ने गांव ढंढूर स्थित नंदीशाला से घायल और छोटे नंदियों को गो अभयारण्य में भिजवा दिया, जबकि बड़े नंदियों को धांसू रोड स्थित बाड़े में शिफ्ट करवाया गया है। दिनभर निगम की गाड़ी नंदियों की शिफ्टिंग में जुटी रही। शिफ्टिंग की एक वजह यह भी है कि ढंढूर की नंदीशाला के बजाय धांसू रोड बाड़े में नंदियों के लिए अधिक सुविधाएं हैं।
गौरतलब है कि कुछ युवाओं ने नंदीशाला में बदहाल अवस्था में रखे गए नंदियों का वीडियो बनाकर उसे सोशल मीडिया में वायरल कर दिया था। इसके बाद अमर उजाला के मंगलवार के अंक में भी नंदीशाला में बदहाली का समाचार प्रकाशित किया गया था।
ढंढूर नंदीशाला की जगह बड़ी, लेकिन प्रबंधन नाममात्र
हालांकि ढंढूर में गो अभयारण्य के सामने ही बनाई गई नंदीशाला की जमीन धांसू रोड स्थित बाड़े से पांच गुणा अधिक है। मगर प्रबंधन नाममात्र है। प्रबंधों के अभाव में नंदी बदहाली का शिकार हो चुके थे। प्रबंधों का इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि नंदीशाला में बनाए गए बड़े शेड के एक तरफ मात्र 10 परदे ही लगाए हुए थे। इन्हीं परदों के जरिये नंदियों को ठंडी हवाओं से बचाने की व्यवस्था की गई थी।
धांसू रोड स्थित बाड़े में हैं 450 नंदी
धांसू रोड पर बने बाड़े में इस समय करीब 450 नंदी रखे गए हैं। इन नंदियों को ठंड से बचाने के लिए पूरी तरह कवर शेड बनाया हुआ है। खुले मैदान में तीन से चार जगह पर उनके हरा चारा व तूड़ी डालने के लिए खोल बनाई हुई है। यहां हरा चारा, गुड़ व दलिया आदि की व्यवस्था दानी सज्जनों के सहारे की जाती है। ऐसे में यहां बड़े नंदियों को आसानी से रखा जा सकेगा।
गो अभयारण्य के आईसीयू में अभी भी 37 गायों का चल रहा उपचार
उधर, गो अभयारण्य में बनाए गए अस्थायी आईसीयू में अभी भी 37 गायों का उपचार चल रहा है। इनमें से आधी गायें ऐसी हैं, जो दम तोड़ने के कगार पर हैं। हालांकि, निगम ने पहले कार्यालय में बैठ कर बाबूगिरी कर रहे दोनों वीएलडीए की ड्यूटी भी गो अभयारण्य में लगा दी है। मगर स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं हो पाया है।
गो अभयारण्य में आने वालों की रजिस्टर में हो रही एंट्री
निगम प्रशासन ने गो अभयारण्य में फिलहाल किसी की एंट्री पर पाबंदी लगाने के फैसले को रोक लिया है। हालांकि, पहले चरण में गो अभयारण्य में आने वाले लोगों की एंट्री के लिए रजिस्टर लगवा दिया है। गेट पर तैनात कर्मचारी रजिस्टर में आने वालों का नाम, पता, मोबाइल नंबर नोट करता है। इसके बाद ही आगे जाने दिया जाता है।
पशुओं की संख्या के मुकाबले नाममात्र हैं कर्मचारी
गांव ढंढूर स्थित गो अभयारण्य व नंदीशाला का दौरा करने वाले अधिकतर शहरवासियों का यही कहना है कि इन दोनों जगहों पर पशुओं की संख्या के मुकाबले देखरेख के लिए लगाए गए कर्मचारियों की संख्या मात्र 20 हैं, जबकि संस्थाओं द्वारा चलाई जा रही गोशालाओं में भी 80 से 100 कर्मचारी काम करते हैं। इसलिए हर कोई गो अभयारण्य व नंदीशाला में 100 से 150 प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती की मांग उठा रहा है।
अमर उजाला की शहरवासियों से अपील
अमर उजाला की शहरवासियों से मार्मिक अपील है कि वह गो अभयारण्य व नंदीशाला में रखे गए पशुओं की मदद के लिए आगे आएं। निगम के पास हरा चारा और अन्य खाद्य सामग्री के लिए पर्याप्त बजट नहीं है। ऐसे में शहरवासियों की मदद से ही पशुओं को बचाया जा सकेगा। अगर अब शहरवासियों ने कदम आगे नहीं बढ़ाए तो निगम भविष्य में पशु पकड़ने का अभियान चलाने की हिम्मत ही नहीं जुटा पाएगा।
छोटे नंदियों को गो अभयारण्य में इसीलिए शिफ्ट किया गया है, ताकि उनकी बेहतर ढंग से देखभाल की जा सके। अगर उन्हें उपचार की जरूरत होगी, तो वह भी यहां आसानी से दिया जा सकेगा।
- डॉ. सतबीर सिंह, वीएलडीए, नगर निगम
अगर निगम प्रशासन गो अभयारण्य व नंदीशाला में गायों व नंदियों की सही देखभाल करना चाहता है तो कर्मचारियों की संख्या 100 से ज्यादा करने की जरूरत है। निगम चाहे कितने ही दावे करें, लेकिन गो अभयारण्य में दो हजार से अधिक पशु अकाल मौत मर चुके हैं। अभी भी सुधार के पर्याप्त कदम उठाने चाहिए।
- अरुण सिहाग, अध्यक्ष, हम एनजीओ