अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा के विवाद में मंगलवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो रही है। इसे लॉरेंस बिश्नाेई की पोस्ट बताकर बिश्नोई समाज के अलग-अलग व्हाटसएप ग्रुप में वायरल किया जा रहा है। पोस्ट में देवेंद्र बूड़िया का समर्थन किया गया है और तानाशाही करने वाले को अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहने की धमकी दी गई है। दोपहर बाद लॉरेंस बिश्नोई-अनमोल बिश्नोई के नाम सेप दूसरी पोस्ट वायरल हुई है, जिसमें पहले पोेस्ट को फेक बताया गया है। पोस्ट में कुलदीप का नाम नहीं दिया गया है।
इधर, कुलदीप बिश्नोई के मीडिया प्रभारी मोहित शर्मा ने वायरल पोस्ट को करीब छह महीने पुरानी तथा फेक आईडी से तैयार बताया है। इस मामले में पुलिस प्रवक्ता विकास कुमार ने कहा कि पुलिस को कोई शिकायत नहीं मिली है।
देवेंद्र बूड़िया और कुलदीप बिश्नोई के बीच पिछले छह महीने से विवाद चल रहा है। 25 जून 2025 को राजस्थान के मुकाम में हुई महापंचायत में बिश्नोई समाज के संतों ने दोनों से अपने अपने पदों से इस्तीफा देने के लिए कहा था। साथ ही अक्तूबर 2025 तक महासभा का चुनाव कराने का फैसला भी लिया गया था।
पहली पोस्ट में लिखा
श्री गुरु जंभेश्वर भगवान की जय। प्रभु श्री रामचंद्र जी के चरणों में नमन। मैं लॉरेंस राष्ट्रीय जीव रक्षा युवा मोर्चा अध्यक्ष। बिश्नोई समाज में (अ.भा बि.) महासभा का चुनाव सर्व समाज के हिसाब से होना चाहिए। चुनाव को एक व्यक्ति ने इस तरह चंगुल में फंसा रखा था कि उसकी ही बात मानी जाती थी और वह तानाशाह की तरह महासभा चलाता था। इस तानाशाही के खिलाफ राष्ट्रीय अध्यक्ष देवेंद्र बूड़िया ने यह निर्णय लिया कि समाज का चुनाव समाज के मौलिक अधिकारों से ही होना चाहिए।
सर्व समाज जिसे अध्यक्ष पद के लिए चुनेगा, वही महासभा का अध्यक्ष होगा। मैं लॉरेंस बिश्नोई समाज का एक अंग होने के नाते हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्णय का समर्थन करता हूं। समाजहित के लिए कभी भी ऐसे तानाशाह को खत्म करने के लिए किसी भी हद तक जाना पड़ा तो मैं और मेरे सभी साथी तैयार रहेंगे। समाज में रहकर जो समाज के साथ तानाशाही करेगा, वह चाहे कोई भी हो, अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहे।
दूसरी पोस्ट में लिखा- जय श्रीराम जय बलकारी
बिश्नोई समाज के सभी भाई बहनों को राम-राम। फेसबुक पर मेरे नाम से एक पोस्ट वायरल की जा रही है, वह पोस्ट फेक है। जिसने भी यह कायराना हरकत की है वो अपना ध्यान रखे। समाज के अंदर दुष्प्रचार न फैलाए। इस मामले में समाज के बड़े बुजुर्ग जो फैसला लेंगे हम उसके पक्ष में हैं।