महिलाओं के उत्थान, उनकी बेहतरी, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसी बात तो सभी करते हैं, लेकिन बालसमंद तहसील के गांव भिवानी रोहिल्ला के लोगों ने इस पर अमल करके भी दिखाया है।
प्रदेश भर के लिए उदाहरण बने इस गांव ने न केवल सर्वसम्मति से पंचायत चुनी है बल्कि सभी पंच और सरपंच महिला ही चुनी गई हैं।
गांव में 12 पंच के लिए एक-एक महिला ने ही नामांकन किए। हालांकि सरपंच के लिए दो महिलाओं (देवरानी-जेठानी) का नामांकन दाखिल कराया गया है, लेकिन यह भी इसलिए कि तकनीकी कारणों से एक का नामांकन खारिज होता है तो दूसरे को सरपंच बनाया जाएगा। महिलाओं की शैक्षक्षिक योग्यता आठवीं से लेकर एमएससी तक है।
पांच हजार से अधिक आबादी वाले भिवानी रोहिल्ला गांव में लगभग 2500 मतदाता हैं। गांव में एक सरपंच तथा 12 पंचों का चुनाव होना था।
सरपंच का पद महिला प्रत्याशी के लिए आरक्षित था। इसके अलावा 12 पंच के पदों में से चार पद आरक्षित थे। ग्रामीणों ने सरपंच सहित सभी पंच पदों पर भी महिला को ही चुनने का सर्वसम्मति से फैसला लिया।
नामांकन के आखिरी दिन मंगलवार को हर एक पद के लिए एक-एक ही नामांकन होने के चलते पूरी पंचायत सर्व सम्मति से चुनी गई मानी जाएगी।
प्रदेश सरकार के एलान के अनुसार इस गांव को पंचायत सर्वसम्मति से चुनने पर 11 लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा।
ये है पढ़ी-लिखी महिला सरकार
सरपंच के लिए सरिता गोस्वामी के नाम पर सहमति बनी है। वह आठवीं पास हैं। पंचों में राजबाला पांचवीं पास, सीमा, सुमन, रुकमा, सुनीता, संतोष आठवीं पास, आरती, सीमादेवी और सुदेश 10वीं पास, सुषमा और सुभिता 12वीं पास हैं तो सुशीला एमएससी (मैथ) पास हैं।
13 जनप्रतिनिधि चुने गए एक भी रुपया खर्च नहीं
चुनाव प्रचार में किसी ने एक रुपया भी खर्च नहीं किया। पूरे गांव में कहीं पर पोस्टर, बैनर, होर्डिंग्स, फ्लैक्स कुछ भी नहीं लगाए गए। किसी भी प्रत्याशी ने किसी से वोट की अपील भी नहीं की।
ग्रामीणों ने खुद ही महिलाओं को आगे बढ़ाया। यहां चुनाव में सरकार का भी कोई खर्च नहीं हुआ। सरपंच के लिए दो नामांकन दिए गए हैं, जिसमें सरिता के अलावा आशा को कवरिंग कैंडीडेट बनाया गया है। ये दोनों देवरानी-जेठानी हैं।
टीम बोली नामांकन लाओ दौड़ पड़ा गांव
मंगलवार को नामांकन का आखिरी दिन था। अधिकतर वार्ड के लिए पहले चरण में नामांकन हो चुके थे। वार्ड नंबर नौ के लिए नामांकन नहीं था। नामांकन लेने वाली टीम ने बताया कि नौ नंबर वार्ड के लिए एक भी आवेदन नहीं भरा गया है। इसके बाद तीन अलग-अलग टीमों ने हिसार तथा बालसमंद में महिला के सभी कागजात पूरे कराते हुए नामांकन भरा।
यह एक अच्छा उदाहरण होगा। ऐसे गांव से हर किसी को सीख लेनी चाहिए। इस तरह के फैसले ही पंचायत की असली शक्ति हैं। ऐसे गांव बेहतर विकास करा सकते हैं।
डॉ. चंद्रशेखर खरे, निर्वाचन अधिकारी, हिसार।
गांव की लड़कियों के लिए कॉलेज, महिला आईटीआई स्थापित कराना मेरा लक्ष्य होगा। गांव में पेयजल की बड़ी समस्या है। इसके लिए काम करना चाहूंगी। हर समस्या का गांव की महिलाएं मिलजुल कर हल निकालेंगी।
- सरिता