कुलदीप जांगड़ा
हिसार। जिले में करीब 570 लोग ऐसे हैं, जो विभिन्न प्रकार के नशों से छुटकारा पाने के लिए शहर के नागरिक अस्पताल में बने ओपिऑयड सब्स्टीट्यूशन थेरेपी (ओएसटी) सेंटर में दवा लेने के लिए पहुंच रहे हैं। सेंटर में प्रतिदिन 225 मरीजों की ओपीडी रहती है। साल भर मेें करीब 52 लोगों ने नशे से मुक्ति पाई है, जबकि 9 लोग नशे के अधिक सेवन के कारण अपनी जान से हाथ धो बैठे हैं।
नशा छोड़ने वाले लोगों में कुछ लोगों ने कंपनी या अन्य जगह पर अच्छी नौकरी हासिल कर नशे पर विजय हासिल की है, जबकि कुछ लोग अपने परिजनों के कामों में हाथ बंटा रहे हैं। हाल ही में इस संबंध में जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अधिकारी के बीच बैठक भी हुई थी। बैठक में नशे के आदी सहित अन्य लोगों को जागरूक करने के लिए निर्देश दिए गए थे, मगर जिला अस्पताल में हालात अलग ही हैं, क्योंकि स्वास्थ्य विभाग अधिकारियों द्वारा नशे के आदी मरीजों की काउंसिलिंग करने के लिए रखे गए काउंसलर को भी हटा दिया है। इस वजह से मरीजों के साथ-साथ स्वास्थ्य स्टाफ की भी परेशानी काफी बढ़ गई है।
एक नर्स संभाल रही जिम्मेदारी
फिलहाल ओएसटी सेंटर में एक स्टाफ नर्स है, जो मरीजों को संभाल रही है। वह दवा देने के साथ-साथ काउंसिलिंग का काम भी कर रही हैं। इसके अलावा सभी मरीजों की डाटा एंट्री करने के लिए एक डाटा ऑपरेटर भी रखा गया है।
कई साल चलता है इलाज
सेंटर 2014 में शुरू हुआ था। नशा छुड़ाने के लिए कई साल तक इलाज चलता है। 3 या कई बार 4 साल तक भी दवा का सेवन करना पड़ता है। इस साल 52 लोगों ने नशे से मुक्ति पाई है। अस्पताल से दवा लेकर नशा छुड़वाने वाले मरीजों की संख्या भी साल-दर-साल बढ़ रही है। अभी प्रतिमाह 4 से 5 नए मरीज दवा लेने पहुंच रहे हैं।
हर वर्ष इस तरह जुड़े नए मरीज
वर्ष मरीज
2017 108
2018 106
2019 177
2020 179
यह बोले नशे से मुक्ति पाने वाले
नियमित दवा से मिली राहत
मिल गेट निवासी व्यक्ति ने बताया कि मुझे नशे से पूरी तरह नफरत हो गई थी, लेकिन मैं खुद नहीं छोड़ पा रहा था। करीब 12 महीने तक मैंने नियमानुसार दवा ली। अब मैं किसी प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता हूं और दवा भी अपने साथ रखता हूं।
दूसरे कामों में लगाया मन
डोगरान मोहल्ला निवासी युवक ने बताया कि मैंने नशा छोड़ने का दृढ़ निश्चय किया और सेंटर पहुंच गया। जब भी मन नशे के लिए करता तो मैं किसी काम या खेल या फिर टीवी देख कर समय व्यतीत करता था। तभी मैं नशा छोड़ पाया हूं। बचपन में ही गलत संगत में आने के कारण दोस्तों के साथ नशे की लत का शिकार हुआ था।
परिजनों का मिला सहयोग
राजीव नगर निवासी युवक ने बताया कि नशा छोड़ने में मुझे परिजनों ने काफी सहयोग किया। हर समय मेरा दवा के साथ-साथ खाने-पीने का भी ध्यान रखते थे। कभी कभार तो वह दवा दिलवाने के लिए मेरे साथ भी अस्पताल आते थे। अब मैं बिल्कुल ठीक हूं और अपने पिता के साथ उनकी दिल्ली स्थित ट्रांसपोर्ट में काम कर रहा हूं।
नियमित रूप से दवा ली
ढंढूर निवासी व्यक्ति ने बताया कि मैंने नियमित रूप से दवा ली और खाने-पीने के साथ-साथ दोस्तों के पास व बाहर जाने का भी नियमित समय बनाया। यदि नशे की ज्यादा इच्छा होती या दवा समाप्त होती तो मैं अस्पताल आ जाता था। इसके साथ-साथ मैंने अपने मन को भी मजबूत बनाए रखा।
काउंसलिंग न पाने के कारण यह बोले मरीज
पहले काउंसलिंग होती थी तो नशा छोड़ने के बारे में क्या करना, क्या खाना-पीना और किस तरह समय व्यतीत करना आदि के बारे में जानकारी दी जाती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है।
मिल गेट निवासी, युवक।
पहले काउंसिलिंग होती थी तो मन भटकाव से बचा रहता था। अब केवल दवा लेकर चले आते हैं। कभी-कभार स्टाफ नर्स द्वारा काउंसिलिंग की जाती है, लेकिन ज्यादा मरीज होने की वजह से वे कम समय दे पाती हैं।
सेक्टर 1-4 निवासी, युवक।
कोई शिकायत नहीं आई
काउंसलर न होने बारे में मेरे पास कोई शिकायत नहीं आई। मैंने कुछ समय पहले ही कार्यभार संभाला है। यदि ऐसी बात है तो इस बारे में पता कर समस्या के समाधान का प्रयास किया जाएगा। वैसे इसका चार्ज डिप्टी सीएमओ के पास है।
डॉ. गोविंद गुप्ता, पीएमओ, नागरिक अस्पताल, हिसार।
सीएमओ से बात करेंगे
फिलहाल कोरोना के चलते सभी काउंसलर की ड्यूटी फील्ड में लगाई गई है। इस बारे में भी सीएमओ से बात की जाएगी, ताकि ओएसटी सेंटर में काउंसलर तैनात किया जा सके। हमारी तरफ से कोशिश की जाएगी कि जल्द ही मरीजों की काउंसिलिंग शुरू की जाए।
-डॉ. कौशल वर्मा, डिप्टी सीएमओ, हिसार।