हिसार। हिसार एयरपोर्ट के लाइसेंस को लेकर डीजीसीए (डायरेक्टरेट ऑफ सिविल एविएशन) के दौरे से पहले बुधवार को नागरिक उड्डयन विभाग के सलाहकार नरहरि सिंह बांगर ने एयरपोर्ट का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने लाइसेंस के लिए जरूरी सभी तैयारियों को परखा। तैयारी को लेकर संतुष्ट दिख रहे बांगर ने कहा कि एयरपोर्ट को जल्द ही लाइसेंस मिल जाने की उम्मीद है। बांगर को हाल ही में इस पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बतौर सलाहकार हिसार एयरपोर्ट पर उनका पहला दौरा था।
बता दें कि विधानसभा चुनाव आचार संहिता लगने से पहले डीजीसीए की टीम ने लाइसेंस को लेकर एयरपोर्ट का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के बाद टीम ने 44 आपत्तियां लगा दी थी। इसी बीच आचार संहिता भी लग गई थी। इसके बाद हिसार एयरपोर्ट अथॉरिटी ने इन आपत्तियों को दूर कर डीजीसीए को ईमेल के माध्यम से अवगत करवा दिया था। यही नहीं, सेफ्टी ऑफिसर खुद आपत्तियों को दूर करने संबंधी दस्तावेज लेकर डीजीसीए के कार्यालय गए थे।
पहले एयरपोर्ट का किया निरीक्षण, फिर अधिकारियों के साथ की बैठक
सलाहकार नरहरि सिंह बांगर बुधवार दोपहर करीब डेढ़ बजे एयरपोर्ट पर पहुंचे। यहां उन्होंने गाड़ी में बैठकर पूरे एयरपोर्ट का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने एयरपोर्ट के सभी संसाधनों के बारे में बारीकी से जानकारी ली। निरीक्षण में करीब एक घंटे का समय लगा। इसके बाद उन्होंने एयरपोर्ट पर चेयरमैन के रूम में हिसार एयरपोर्ट अथॉरिटी व बीएंडआर के अधिकारियों के साथ बैठक की। यह बैठक करीब 15 मिनट चली। यहां भी उन्होंने लाइसेंस के संबंध में जरूरी संसाधनों को लेकर बातचीत की।
2030 तक पूरा होगा टर्मिनल का निर्माण
उधर, एयरपोर्ट पर करीब 500 करोड़ की लागत से बनने वाले टर्मिनल को लेकर एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) की टीम शहर में पहुंच गई है। उन्होंने यहां अपने कार्यालय बना लिए हैं और टर्मिनल को लेकर मार्किंग का कार्य भी शुरू कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के मानकों के हिसाब से इस टर्मिनल का निर्माण 2030 तक पूरा किया जाना है। टर्मिनल का एरिया 37,970 वर्ग मीटर होगा और इसकी क्षमता 2.1 मिलियन पैसेंजर प्रति वर्ष होगी, जिससे 3.6 मिलियन पैसेंजर प्रति वर्ष तक बढ़ाया जा सकेगा।
एक दिन पहले पूर्व कैबिनेट मंत्री ने भी किया था दौरा
इससे पहले मंगलवार को पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. कमल गुप्ता ने भी एयरपोर्ट का निरीक्षण किया था। इस दौरान उन्होंने कहा था कि यहां एटीसी टावर बनकर तैयार है। रनवे पर नाइट लैंडिंग के लिए कैट लाइट भी लगाई जा चुकी है। यहां डीवीओआर लगाया गया है, जो राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के एयरपोर्ट पर लगाया जाना अति आवश्यक होता है। यह ग्राउंड आधारित रेडियो नेविगेशन सिस्टम है। इस सिस्टम की मदद से किसी भी हवाई जहाज को दिशा दिखाई जा सकती है। इसके अलावा एयरपोर्ट पर आग बुझाने के लिए दो गाड़ियां भी आ चुकी हैं।
एयरपोर्ट पर उतर चुका है प्रधानमंत्री का जहाज
विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 सितंबर को हिसार में रैली की थी। यह रैली एयरपोर्ट के साथ लगते मैदान पर की गई थी। इस दौरान प्रधानमंत्री का जहाज इसी एयरपोर्ट पर उतारा गया था। हवाई पट्टी के विस्तार के बाद पहली दफा इतना बड़ा जहाज यहां उतरा था।
एलआईएस सिस्टम लगाना बाकी
नाइट लैंडिंग के लिए अभी एलआईएस (लैंडिंग इंस्ट्रूमेंट सिस्टम) लगाया जाना शेष है। जब तक यह सिस्टम नहीं लगेगा, तब तक एयरपोर्ट को हवाई जहाज की नाइड लैंडिंग की अनुमति नहीं मिलेगी। अगर इससे पहले एयरपोर्ट को लाइसेंस मिल जाता है और इसके बाद यह सिस्टम लगता है तो एयरपोर्ट अथॉरिटी को फिर से नया लाइसेंस लेना होगा, जिसमें नाइट लैंडिंग की भी अनुमति होगी।
वर्ष 2014 में शुरू हुआ था काम
हिसार के हवाई अड्डे को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने के लिए वर्ष 2014 में यहां काम शुरू हुआ था। उस समय एयरपोर्ट के पास 200 एकड़ जमीन थी। दो चरणों में इसमें 7 हजार एकड़ जमीन को जोड़ा गया। यह देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बनेगा, क्योंकि किसी भी एयरपोर्ट के पास इतनी जमीन नहीं है। लाइसेंस मिलते ही यहां से अयोध्या, जम्मू, जयपुर व अहमदाबाद के लिए हवाई सेवा शुरू की जाएगी। इसके लिए एलायंस एयर के साथ एमओयू भी हो चुका है।