हिसार। कैंसर के बढ़ते मामलों पर अंकुश लगाने के लिए स्वास्थ्य महकमा 30 से अधिक उम्र के लोगों की स्क्रीनिंग में जुटा है ताकि शुरुआती चरण में ही रोग की पहचान हो जाए। विभाग ऐसे लोगों के स्वास्थ्य का रिकॉर्ड जुटा रहा है। लोगों को कैंसर के शुरुआती लक्षणों के प्रति भी सतर्क किया जा रहा है। इसके साथ ही मधुमेह और उच्च रक्तचाप (बीपी) की नियमित जांच कराने की सलाह दी जा रही है।
देश में फिलहाल स्तन कैंसर, गर्भाशय (बच्चेदानी) का कैंसर और मुख कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। मधुमेह और बीपी के रोगियों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। पीजीआई रोहतक से प्रशिक्षण लेकर लौटे डॉ. अजय चुघ और डॉ. अभिषेक मरीजों की जांच कर रहे हैं। इसके लिए अस्पताल परिसर में कैंसर डे-केयर सेंटर भी स्थापित किया गया है। मरीज में कैंसर के प्रारंभिक लक्षण पाए जाने पर, पीजीआई रोहतक या निजी अस्पताल में जांच के लिए कहा जाता है। कैंसर की पुष्टि होने के बाद मरीज का उपचार शुरू करवाया जाता है और उन्हें सरकार की ओर से देय सुविधाएं दिलाने में मदद की जाती है। एनसीडी क्लीनिक में डॉ. नीरू गुप्ता और डॉ. मीलू लांबा की टीम मरीजों की काउंसिलिंग कर रही हैं। इस अभियान में आशा कार्यकर्ताओं की भी अहम भूमिका है जो गांव-गांव जाकर लोगों का स्वास्थ्य डेटा एकत्र कर रही हैं। लोगों को बीपी-शुगर और कैंसर के प्रति जागरूक करते हुए उन्हें जांच कराने के लिए प्रेरित करती हैं ताकि प्राथमिक स्तर पर ही रोग की पहचान की जा सके।
एनसीडी पोर्टल पर 50 हजार मरीज दर्ज
जिले में एनसीडी पोर्टल पर अब तक 50,000 मरीज दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें 43,507 बीपी और 24,054 मधुमेह के मरीज हैं, जबकि कैंसर के 1,000 से अधिक मरीज चिन्हित किए जा चुके हैं। 30 अक्तूबर को आयुष विभाग के अंतर्गत आयुर्वेदिक, यूनानी और होम्योपैथी अनुभाग के स्टाफ को कैंसर मरीजों के इलाज का प्रशिक्षण दिया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि सभी कार्मिकों की कुशलता बढ़ाने से ही शुरुआती चरण में मरीजों की पहचान संभव हो सकेगी। स्तन कैंसर के मरीजों की पहचान प्रारंभिक अवस्था में ही होने की संभावना अधिक रहती है, जबकि अन्य कैंसर के लिए स्वास्थ्यकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
ऐसे होती है कैंसर की जांच
इमेजिंग टेस्ट: एक्स-रे, सीटी स्कैन, एमआरआई, अल्ट्रासाउंड और पीईटी स्कैन।
रक्त जांच: ट्यूमर मार्कर सहित।
बायोप्सी: कैंसरग्रस्त ऊतक का नमूना लेकर जांच।
एंडोस्कोपी: शरीर के अंदरूनी अंगों की जांच।
आनुवंशिक परीक्षण: कैंसर की जड़ और प्रकार की पहचान।
(ये सभी जांचें यह तय करने में मदद करती हैं कि शरीर में कैंसर है या नहीं, वह कहां स्थित है, कितना फैला है और किस प्रकार का है। इसके आधार पर डॉक्टर इलाज की योजना तैयार करते हैं।
हमारा प्रयास है कि 30 साल से अधिक आयु के अधिकाधिक लोगों का स्वास्थ्य डाटा एकत्रित कर रहे हैं ताकि मरीजों की शुरुआती चरण में ही पहचान की जा सके। स्वास्थ्य जांच करने के साथ ही उन्हें कैंसर के लक्षणों के बारे में बताया जा रहा है ताकि बिना किसी देरी के अस्पताल पहुंचकर जांच करवा सकें।
- डॉ. सपना गहलावत, सिविल सर्जन, हिसार।