भारतीय महिला हॉकी टीम में हरियाणा की आठ बेटियों ने दमखम दिखाया। इनमे हिसार की दीपिका, उदिता व सोनिका, कुरुक्षेत्र नवनीत कौर, सिरसा की सविता पूनिया और सोनीपत की निशा, मोनिका व नेहा शामिल हैं।
दीपिका के पिता बोले- गोल्ड जीत जाती तो सोने पर सुहागा
दीपिका के पिता जगदीश सिंह का कहना है यदि बेटी गोल्ड जीत जाती तो सोने पर सुहागा हो जाता। खैर कोई बात नहीं पदक का रंग बदलने के लिए आगे और भी मौके मिलेंगे। एशियन गेम्स में यहां तक पहुंचना भी बहुत बड़ी बात है। बेटी ने कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। मुझे बेटी पर गर्व हैं।
सीनियर हॉकी कोच आजाद मलिक का कहना है कि दीपिका देश की बेस्ट ड्रैग फ्लीकर में से है। ड्रैग फ्लीकर का काम पेनाल्टी कॉर्नर के समय बॉल को ड्रैग कर गोल करना होता है। उन्होंने कहा कि हमें कई गोल करने के मौके मिले थे, पर हमारे खिलाड़ियों ने उन्हें गंवा दिया। अभी सुधार की जरूरत है।
सिरसा के जोधका से गोलकीपर सविता पूनिया के पिता महेंद्र पूनिया का कहना है कि बेटी ने 15 गोल रोके हैं। टीम पूरे कोऑर्डिनेशन के साथ खेली। सेमीफाइनल में जब चीन के साथ मैच हुआ तो भारतीय टीम पर काफी दबाव था। यदि टीम फाइनल में होती तो बिल्कुल भी प्रेशर नहीं होता।
जीत का आधार बनीं मोनिका, नेहा और निशा
सोनीपत के गांव गामड़ी और फिलहाल चंडीगढ़ निवासी मोनिका मलिक ने एशियन गेम्स में तीन मुकाबलों में टीम के लिए एक-एक गोल किया। वहीं सोनीपत के आर्य नगर की रहने वाली नेहा गोयल ने एक गोल व सोनीपत के वेस्ट रामनगर की निशा वारसी ने टीम के लिए खेल दिखाया।