कला व संस्कृति करती है मानसिक गंदगी दूर करने का काम : शेखर सेन
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जिस देश ने अपने यहां कला और संस्कृति का गला घोंट दिया है वो देश आज आतंकवाद से जूझ रहा है। किसी भी देश में आतंकवाद पर लगाम लगाने के लिए वहां की कला व संस्कृति को सहेज कर रखना बहुत जरूरी है। क्योंकि मानसिक गंदगी को दूर करने का काम कला व संस्कृति ही कर सकती है। यह बात राष्ट्रीय संगीत नाटक एकेडमी के चेयरमैन शेखर सेन ने हिसार में कही। वह अभिनय रंग मंच के 21 दिवसीय थियेटर फेस्टिवल का अवलोकन करने के लिए हिसार पहुंचे थे।
उन्होंने कहा कि कला व्यक्ति के मन को सकारात्मक कार्यों की तरफ ले जाती है। बिना कला के व्यक्ति नकारात्मक विचारों से भर सकता है। यही कारण है कि जिन देशों में वहां की कला व संस्कृति का गला दबा दिया गया है, वहां आतंकवाद ज्यादा है। उन्होंने कहा कि भारत में भी प्राचीन लोक कलाएं और संस्कृति को बचाया जाना बेहद आवश्यक है क्योंकि बहुत सी प्राचीन कलाएं विलुप्त होने के लिए खतरे के निशान पर हैं। राष्ट्रीय संगीत नाटक एकेडमी यही काम करती है।
विश्व प्रसिद्ध गायक, संगीतकार, गीतकार व लेखक तथा पद्मश्री अवॉर्ड से नवाजे जा चुके शेखर सेन अपने एकल संगीत नाटक तुलसी, कबीर, विवेकानंद, साहब और सूरदास के लिए पहचाने जाते हैं। वर्ष 2015 में भारत सरकार ने उन्हें संगीत नाटक एकेडमी का चेयरमैन बनाया था और उन्होंने यह पद संभालने के बाद कलाकारों के प्रोत्साहन के लिए बहुत से सराहनीय कार्य किए हैं। उन्होंने बताया कि फिलहाल वो एक प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं, जिसमें वो भारत के किसान परिवारों में छुपी कला व संस्कृति को बाहर लाकर बढ़ावा देना चाहते हैं।