एक साल की उम्र में ही पिता का साया उठ गया। मां और मामा के हौसलों के पंखों से उड़ान भरना सीखा। करीब आठ साल की कठिन मेहनत से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। यह कहानी है अंतरराष्ट्रीय बॉक्सिंग खिलाड़ी सीमा पूनिया की है। सीमा जब एक साल की थीं तो उसके पिता चल बसे। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। सीमा की मां ने खुद और बेटी को संभाला। मां और मामा की प्रेरणा से अंतरराष्ट्रीय बॉक्सिंग खिलाड़ी बनी और अपने परिवार की आर्थिक दशा को भी सुधारा।
भाई-बहनों को देेख मिली प्रेरणा
सीमा पूनिया को बॉक्सिंग में आने की प्रेरणा मामा के बच्चों से मिली। वो अपने मामा के बच्चों को खेलते देखतीं तो उसे भी महसूस होता कि वो भी बॉक्सिंग कर सकती है। बस उसने अपनी ये इच्छा मां और मामा को बताई। मामा ने हिसार के साईं सेंटर में उसे बॉक्सिंग के प्रशिक्षण के लिए भर्ती करा दिया। इसके बाद सीमा ने महज 8 साल के खेल कॅरियर में वर्ल्ड चैंपियनशिप, एशियन चैंपियनशिप समेत सहित काफी प्रतियोगिताओं में गोल्ड मेडल हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। सीमा पूनिया आज बतौर हेड टीसी रेलवे में कार्यरत हैं और साथ ही कॉमनवेल्थ व एशियन चैंपियनशिप की तैयारी कर रही हैं।
बॉक्सिंग के चलते छोड़ा राजस्थान
बॉक्सिंग के शौक के चलते सीमा पूनिया ने 2008 में राजस्थान छोड़कर हिसार के साईं सेंटर में बॉक्सिंग का प्रशिक्षण लेना आरंभ किया। सीमा मूलत: राजस्थान के झुंझनूं जिले के चिड़ावा गांव की रहने वाली है। लेकिन उनकी माता हरियाणा में भिवानी जिले से हैं। इसके चलते वह अपने मामा के यहां आती जाती रहती थी। बॉक्सिंग के शौक के चलते उनके मामा ने उन्हें साईं सेंटर में प्रशिक्षण के लिए भेजा। सीमा के घर में उसकी मां के अलावा उसका एक छोटा भाई भी है, जो इंजिनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है।
खेल के साथ-साथ पढ़ाई भी
सीमा पूनिया ने बॉक्सिंग के साथ-साथ अपनी पढ़ाई को भी जारी रखा है। उन्होंने राजस्थान से 9वीं कक्षा तक पढ़ाई के बाद भिवानी आकर अपनी ग्रेजुएशन पूरी की। सीमा पूनिया ने बताया कि उसकी खेेलों के साथ पढ़ाई में भी काफी रुचि रही है, जिसके चलते वो अपनी बीए की पढ़ाई पूरी कर पाई हैं।
सीमा पूनिया की उपलब्धियां
- 2016 में हरिद्वार में नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड
- 2016 में कजाकिस्तान में वर्ल्ड चैंपियनशिप में भाग लिया
- 2016 में सर्बिया में 5वीं नेशनल कप में गोल्ड
- 2015 में चाइना में एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड
- 2015 में आसाम में नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड
- 2014 में रायपुर में नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड
- 2012 में चेन्नई में नेशनल में गोल्ड
- 2011 में नैनीताल में ऑल इंडिया सुपर कप में सिल्वर मेडल
- 2011 में झारखंड में नेशनल गेम्स में ब्रांज मेडल
- 2008 में काकीनादा में जूनियर नेशनल में ब्रांज मेडल