लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों को कम करने के लिए जिला प्रशासन ने कवायद शुरू कर दी है। प्रदेश सरकार की ओर से 10 फीसदी हादसे कम करने के निर्देश के बाद प्रशासन जुट गया है। इसके तहत तैयार किए जा रहे ई रोड एमआईएस के मोबाइल एप में अब एक्सीडेंट जोन भी चिह्नित किए जाएंगे। इसका करीब 75 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। फरवरी अंत तक इसे पूरा कर लिया जाएगा। मार्च में इस एप का ट्रायल शुरू किया जाएगा। अगले माह अधिकारियों के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम भी होगा।
पायलेट प्रोजेक्ट के तहत तैयार किए जा रहे ई रोड मोबाइल एप में डीसी निखिल गजराज ने तीन बदलाव कराए हैं। इस मोबाइल एप में अब सभी सड़क हादसे होने वाले एरिया चिह्नित होंगे। पुलिस विभाग को इस एप से लिंक किया जाएगा। कोई भी हादसा होने के बाद पुलिस लोकेशन अपडेट करेगी। साल भर के हादसों की अपडेट इस एप पर होगी। जिसके बाद सबसे अधिक हादसे वाले एरिया रेड जोन घोषित किए जाएंगे। पुलिस व प्रशासन की ओर से ऐसे रोड जोन में हादसों के कारणों पर प्रशासन रिसर्च कराएगा। कारण जानने के बाद इन्हें दूर करने का प्रयास किया जाएगा। प्रदेश सरकार की ओर से इस प्रोजेक्ट के लिए हिसार को चुना गया था। जिसके बाद से जिले भर की सभी सड़कों की जीपीएस, जीआईएस लोकेशन अपलोड की जा रही है। सड़कों की जानकारी विभागों से लेकर कंप्यूटर में अपडेट की जा रही है, जिसमें करीब 75 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। फरवरी अंत तक इसे पूरा किया जाएगा। प्रशासन की ओर से 27 फरवरी को इसका डेमो लिया जाएगा। जिसमें विभागों के अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे। गौरतलब है कि पिछले वर्ष 550 के करीब बड़े सड़क हादसे हुए थे, जिनमें 250 लोगों की मौत हो गई थी।