स्वदेशी मेले में स्टाल लगाकर लोगों को उत्पादों की जानकारी देतीं बाला।
हिसार। ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) से जोड़कर सरकार की ओर से स्वावलंबी बनाया जा रहा है। इसके तहत पात्र समूहों को आर्थिक मदद दिलाई जा रही है। इसका लाभ गांव आदमपुर के गणेश महिला एसएचजी से जुड़ी 10 सदस्यों ने भी उठाया है।
इसी आधार पर पहले घरों में लोहे के बर्तन बनाकर वाहनों में फेरी लगाकर बेचने वाले परिवारों को अब जिला और प्रदेश स्तर तक के कई मेलों में बुलाकर कारोबार की सुविधा दिलाई जा रही है। इसके तहत उन्हें स्टाल दिलाए जा रहे हैं। इससे उनका कारोबार और आय बढ़ी है।गणेश एसएचजी की अध्यक्ष बाला ने बताया कि उनका मायका जिला हनुमानगढ़ (राजस्थान) के सीमावर्ती गांव बड़ी छानी में है। उनके ससुराल और मायका पक्ष के दोनों परिवार गड़िया लुहार जाति से ताल्लुक रखते हैं।
पहले वह स्वयं हाथों से लोहा पीटकर बर्तन बनाते थे, लेकिन अब दोनों परिवारों ने कुछ मशीनें लगाकर एक-दूसरे को कारोबारी सहारा दिया है। इन मशीनों के नाम डीप और कटिंग मशीन हैं। खराद मशीन से लकड़ी के चकला, बेलन भी बनाकर बेचे जा रहे हैं।
बाला के पति पृथ्वीराज ने बताया कि उन्होंने कसिया और खुरपी को एक औजार में मिलाकर बनाया है। इसकी कीमत 200 रुपये हैं। इसके सहारे एक सिरे से खोदाई और दूसरे सिरे से निराई, गुड़ाई की जा सकती है। उनका समूह कड़ाही, तवा, मसालदानी, चिमटा, सूप का बर्तन, फ्राई पैन, नूडल पकाने वाला पैन का भी कारोबार कर रहा है। इस कारण सदस्यों की सालाना कमाई हजारों से बढ़कर लाख रुपये तक पहुंच गई है।
सीएम के हाथों सम्मानित हो चुकीं बाला-
श्रीगणेश समूह की अध्यक्ष बाला ने बताया कि पंचकूला में छह से 23 नवंबर तक सरस मेला आयोजित किया गया। इसमें मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उन्हें नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया। पिछले माह नौ से 11 नवंबर तक उन्होंने राजगढ़ रोड स्थित कबीर धर्मशाला परिसर में आयोजित गीता जयंती समारोह में भी स्टाल लगाया था। उस मेले में कैबिनेट मंत्री रणवीर गंगवा मुख्य अतिथि रहे थे।