नारनौंद। राखीगढ़ी के टीलों में शनिवार को प्रतिभागियों ने करीब 5,000 साल पुरानी हड़प्पा सभ्यता की कहानी जानी। पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग हरियाणा ने राहगीरी फाउंडेशन के सहयोग और प्रायोजन से विरासत भ्रमण कराया। दिल्ली-एनसीआर सहित स्थान-स्थान से पहुंचे प्रतिभागियों ने पुरातात्विक टीलों और उत्खनन स्थलों का भ्रमण किया।
विरासत भ्रमण का नेतृत्व डॉ. कुश ढेबर ने किया। विभाग की ओर से विनीत भनवाला ने आयोजन एवं समन्वय किया। राहगीरी फाउंडेशन की ओर से डॉ. भट्टाचार्य और कुणाल शामिल हुए। डॉ. कुश ढेबर ने प्रतिभागियों को राखीगढ़ी के टीलों और उत्खनन क्षेत्रों की महत्ता बताई।
उन्होंने कहा कि हड़प्पा सभ्यता में नगर नियोजन, आवासीय संरचना, शिल्पकला, व्यापार और जल प्रबंधन जैसी व्यवस्थाएं विकसित थीं। प्रतिभागियों ने हड़प्पन नॉलेज सेंटर का भी दौरा किया। यहां उन्हें राखीगढ़ी और हड़प्पा सभ्यता से जुड़े पहलुओं की जानकारी मिली।
राहुल आर्टिस्ट की पॉटरी कार्यशाला में प्रतिभागियों ने मिट्टी से बर्तन बनाने की पारंपरिक कला सीखी और खुद बर्तन तैयार किए। राखीगढ़ी रिसोर्ट एंड फार्म में हरियाणवी व्यंजनों का स्वाद भी चखा। आयोजन का मुख्य उद्देश्य इतिहास, पारंपरिक शिल्प और स्थानीय संस्कृति से जोड़कर राखीगढ़ी की विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।