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Hisar News: पानी के लिए बुजुर्ग महिला ने जेई के पकड़ लिए पांव, आश्वासन के बाद ही छोड़ा साथ, बासड़ा की महिलाओं ने एक्सईएन कार्यालय में मटके फोड़कर किया प्रदर्शन

Fri, 07 Aug 2026 11:41 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
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अ​धिकारी के पैर पकड़कर बैठी महिला। स्रोत : वीडियोग्रैब - फोटो : 1
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हिसार। गांव बासड़ा में 25 दिनों से पेयजल संकट से परेशान महिलाओं का सब्र शुक्रवार को जवाब दे गया। जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के कार्यकारी अभियंता (एक्सईएन) कार्यालय में प्रदर्शन के दौरान एक बुजुर्ग महिला पानी की मांग को लेकर जूनियर इंजीनियर (जेई) के पांव पकड़कर बैठ गई। महिला ने तब तक जेई के पैर नहीं छोड़े, जब तक उन्होंने गांव में नियमित पेयजल आपूर्ति कराने का आश्वासन नहीं दिया। इस दौरान महिलाओं ने मटके फोड़कर विरोध जताया और एक्सईएन कार्यालय के बाहर फर्श पर धरना देकर नारेबाजी की।
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महिलाओं ने बताया कि गांव में पिछले 25 दिनों से पर्याप्त पेयजल नहीं मिल रहा है। मजबूरी में हर तीसरे दिन 800 से 1000 रुपये खर्च कर टैंकर मंगवाने पड़ रहे हैं। कई बार शिकायत के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि 25 करोड़ रुपये की पेयजल योजना को सही ढंग से संचालित नहीं किया जा रहा। पंप हाउस को हॉट लाइन से नहीं जोड़ा गया, जिससे बिजली कटते ही मोटर बंद हो जाती है और दोबारा चलने में करीब आधा घंटा लग जाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
ठेकेदार से भी हुई तीखी नोकझोंक
प्रदर्शन के दौरान विभागीय अधिकारियों ने ठेकेदार रामफल सांगवान को मौके पर बुलाया। ग्रामीण कमल सिंह, राकेश और कृष्णा देवी ने नियमित जलापूर्ति नहीं होने का आरोप लगाया। इस दौरान ठेकेदार और ग्रामीणों के बीच तीखी बहस भी हुई। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार ने कथित तौर पर कहा, पानी नहीं मिलेगा जो करना है कर लो।
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25 करोड़ की योजना पूरी, फिर भी नहीं मिल रहा पानी
बालसमंद क्षेत्र के छह गांवों तक पेयजल पहुंचाने के लिए करीब 25 करोड़ रुपये की परियोजना के तहत सीसवाला हेड पर पंप हाउस बनाया गया था। लेकिन इसे आज तक हॉट लाइन से नहीं जोड़ा गया। घरेलू फीडर से बिजली मिलने के कारण बार-बार कटौती होती है, जिससे मोटर बंद हो जाती है और गांवों की जलापूर्ति प्रभावित होती है।
2018 के आंदोलन के बाद बनी थी योजना
बालसमंद, बासड़ा, किरतान, सरसाना, गोरछी और बुड़ाक समेत छह गांवों के ग्रामीणों ने वर्ष 2018 में करीब तीन महीने तक आंदोलन किया था। इसके बाद चौधरी माइनर से करीब 30 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई गई और वर्ष 2021 में परियोजना पूरी हुई। करीब 40 हजार आबादी को राहत देने के उद्देश्य से बनी यह योजना बिजली व्यवस्था की खामी के कारण अपेक्षित लाभ नहीं दे पा रही है।
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