अरावली छात्रावास में अपनी पत्नी के साथ खड़े 75 वर्षीय डॉ.गुरबक्श राय मल्होत्रा।
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आया है मुझे याद फिर वो गुजरा जमाना कॉलेज का... इन लाइनों को गुनगुनाते हुए करीब 70 वर्षीय डॉ. गुरबक्श राय मल्होत्रा लुवास के अरावली हिल हॉस्टल के कमरा नंबर 110 के सामने पहुंचते हैं। यहां कमरे की दीवारों, गेट आदि की ओर देखकर इशारा करते हुए कहते हैं, यही वो कमरा है, जब मैंने वेटरनेरी कॉलेज में दाखिले के बाद पहला साल बिताया। कैसे 55 साल बीत गए... । जब 1963 में यहां दाखिला लिया था, तब यहां एकमात्र हॉस्टल था और वो था हमारा ये अरावली हिल हॉस्टल। बहुत यादें जुड़ी हैं इसके साथ। हल्की मुस्कान और हॉस्टल के दूसरे कमरों की ओर नजरें ठहराते हुए डॉ. गुरबक्श दोस्तों को याद करने लगे।
महिपाल वहां रहता था, वहां उस कमरे में सरदार रहता था, और भी न जाने क्या-क्या। लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय में हुई पहली एलुमनाई मीट में 50 से 70 साल पुराने दोस्त मिले और उन्होंने कालेज और हॉस्टल का दौरा कर अपनी पुरानी यादें ताजा कीं। हरियाणा के अनेक जिलों में बतौर एनिमल हसबैंडरी के डिप्टी डायरेक्टर रहे डॉ. गुरबक्श राय ने कार्यक्रम के लिए लुवास के कुलपति डॉ. गुरदियाल सिंह, डॉ. त्रिलोक नंदा, डा. अशोक, डॉ. अरुण सांगवान आदि का धन्यवाद किया। शुक्रवार को सभी एलुमनाई ने लुवास के निर्माणाधीन नए कॉलेज का भी भ्रमण किया। इसके बाद यह दो दिवसीय मीट एलुमनाई एसोसिएशन के चुनाव के साथ संपन्न हुई।