मैं छात्र नेता था और हम खूब शरारती थे। मेरे एडवाइजर से मेरी अच्छी सेटिंग हो गई थी और हमने मिलकर दो दिन में रिसर्च पेपर तैयार कर दिया। फिर दो दिन जमकर दावत चली। इस बीच मेरे एडवाइजर बदल गए और वर्तमान कुलपति डॉ. गुरदियाल सिंह को मेरा एडवाइजर बना दिया गया। उन्होंने मेेरे पेपर फाड़कर फेंक दिए और कहा ढंग से काम करो। आज यहां का माहौल इतना बदल गया है कि बच्चे गेस्ट का स्वागत कर रहे हैं और जब हम पढ़ते तो टीचर कहते थे, आ मत जाईयो...कदै प्रोग्राम बिगाड़ दयो। लाला लाजपत राय पशु विज्ञान एवं पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय की एलुमनाई मीट में यहां के पूर्व छात्र और मत्स्य, डेयरी एवं पशुपालन के राज्य मंत्री संजीव बाल्यान ने हंसी और ठहाकों के बीच पुरानी यादें ताजा करते हुए कहीं। वे यहां बतौर मुख्य अतिथि शिरकत कर रहे थे। इस अवसर पर एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष मेजर जनरल डॉ. आरएम खरब एवीएसएम (सेवानिवृत्त) और पूर्व कुलपति व प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. एमएल मदन बतौर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। एलुमनाई मीट के साथ ही उत्पादन व उत्पादकता बढ़ाने के लिए तथा पशुपालन को टिकाऊ व्यवसाय के रूप में विकसित करने के लिए एक कार्यशाला का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम के शुरू में लुवास एलुमनाई के अध्यक्ष डॉ. त्रिलोक नंदा ने सभी का स्वागत किया। समारोह में लुवास के कुलपति डॉ. गुरदियाल सिंह, एचएयू के कुलपति डॉ. केपी सिंह, लुवास के अधिकारी, प्राध्यापक व पूर्व विद्यार्थी भी मौजूद रहे।
लाला के समोसे और हिसार की शादियां नहीं भूल सकते
डॉ. संजीव बाल्यान ने कहा कि यहां कैन्टीन के लाला जी समोसे और हिसार की शादियां नहीं भूली जा सकती। एक कार्ड आता था और हम 50 स्टूडेंट शादी में जाते थे। उन्होंने कहा कि 1988 में मैंने दिल्ली में जांबाज फिल्म देखी थी, जिसके बाद यहां दाखिले का भूत सवार हो गया। 1989 से 2004 तक मैं यहां इस यूनिवर्सिटी में रहा और जिस वेटरनरी ऑडिटोरियम में बैठे हैं इसमें मैंने करीब 800 फिल्में देखी होंगी। फिल्में नहीं चलती थी तो हम प्रदर्शन कर देते थे। तब एचएयू में झाड़ियां होती थी, लेकिन वर्तमान कुलपति डॉ. केपी सिंह ने यहां साफ-सफाई और पेड़-पौधे लगाकर सूरत बदल दी है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पशुपालन क्षेत्र के महत्व को जानते हुए अलग मंत्रालय की स्थापना की है। इसका चार्ज मुझे दिया गया है और मेरी यह कोशिश रहेगी कि पशुपालन क्षेत्र को अधिक लाभकारी बनाया जाए।
लुवास का है गौरवमयी इतिहास : कुलपति
लुवास विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गुरदियाल सिंह ने कहा कि लुवास विश्वविद्यालय का इतिहास पुराना एवं गौरवमयी रहा है। खुशी की बात है कि इस विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न पदों पर कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी इस प्रकार के आयोजन किये जाते रहेंगे ताकि पूर्व छात्रों का आपस में और विश्वविद्यालय से संपर्क बना रहे।
गोशालाएं बिजली उत्पन्न करें : डॉ. खरब
इस अवसर पर मेजर जनरल डॉ. आरएम खरब ने कहा कि विश्वविद्यालय का यह अच्छा प्रयास है कि सभी पूर्व छात्रों को पशुपालन क्षेत्र के विकास के लिए अपने विचार आदान-प्रदान करने का अवसर दिया। उन्होंने पशु उत्पादकता बढ़ाने और गोशालाओं को बिजली पैदा करने के लिए प्रोत्साहन पर बल दिया। कहा कि बेहतर नस्ल से ही उत्पादकता में वृद्धि की जा सकती है। इसके लिए आधुनिक विधियों का प्रयोग आवश्यक है।
इन भूतपूर्व विद्यार्थियों को किया सम्मानित
कुलपति डॉ. गुरदियाल सिंह द्वारा इस एलुमनाई मीट में उपस्थित पूर्व छात्रों को सम्मानित किया। इनमें 1956 बैच के डॉ. डीडी शर्मा, 1959 बैच के डॉ. एमएल मदन, 1961 बैच के डॉ. पीके उप्पल, 1961 बैच के मेजर जनरल डॉ. आरएम खरब वीएसएम, 1964 बैच के डॉ. विद्या सागर, 1962 बैच के डॉ. एसके महिपाल, 1963 बैच के डॉ. एमसी गोयल, ले. कर्नल डॉ. एमएल शर्मा (1967), डॉ. एसके गर्ग (1967), डॉ. जीआर मल्होत्रा (1967), डॉ. एचएस दहिया (1963), डॉ. केआर भटनागर (1968) आदि शामिल रहे।