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फर्जी डिप्लोमा पर दो एएलएम कर रहे थे नौकरी, सस्पेंड

Sat, 14 Jun 2014 12:00 AM IST
हिसार
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बिजली निगम में दो लोगों ने फर्जी डिप्लोमा के आधार पर असिस्टेंट लाइनमैन (एएलएम) की नौकरी पा ली। मामले का खुलासा होने पर बिजली निगम ने दोनों आरोपियों को सस्पेंड करके उनके खिलाफ मामला दर्ज करा दिया है। निगम इन आरोपियों से रिकवरी करने की प्रक्रिया भी शुरू करने वाला है।
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पुलिस प्रवक्ता हरीश भारद्वाज ने बताया कि आरोपियों का नाम कालीरावण निवासी सतीश कुमार और हांसी के गांव घिराय निवासी वीरेंद्र सिंह है। दोनों असिस्टेंट लाइनमैन के पद पर राजगढ़ रोड स्थित बिजली निगम के डिवीजन नंबर दो के एक्सईएन कार्यालय में कार्यरत थे।

जब उनके दस्तावेजों की जांच हुई तो दोनों के डिप्लोमा सर्टिफिकेट फर्जी पाए गए। बिजली निगम ने दोनों आरोपियों को सस्पेंड करने के बाद मामला दर्ज करा दिया।
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जांच में पता चला कि सतीश ने उत्तर प्रदेश के जौनपुर स्थित आईटीआई शिक्षण संस्थान के फर्जी डिप्लोमा के आधार पर बिजली निगम में 16 नवंबर 2012 को एएलएम के पद पर ज्वाइन किया था, जबकि आरोपी वीरेंद्र ने उत्तरप्रदेश के मुरादाबाद के चंदोसी के आईटीआई के नाम का फर्जी डिप्लोमा बनवाकर 31 अक्तूबर 2012 कर एएलएम के पद पर ज्वाइन किया था।

पुलिस को दी शिकायत में डिवीजन नंबर दो के कार्यकारी अभियंता एसके सिंह ने बताया कि फर्जी डिप्लोमा की बात सत्यापित होने के बाद भी वीरेंद्र ने गुमराह करने का प्रयास किया।

वीरेंद्र चार बार उसी आईटीआई संस्थान का फर्जी प्रमाण पत्र भी बनवाकर लाया, जिसमें उसके डिप्लोमा के सही होने की पुष्टि की गई थी। इसके बाद संस्थान के निदेशक से संपर्क कर जांच कराई गई तो पुष्टि हुई कि वीरेंद्र का डिप्लोमा फर्जी है। विभाग की ओर से संबंधित संस्थान पर भी कार्रवाई की मांग की गई है।  

फतेहाबाद और टोहाना में भी मिले थे फर्जी एएलएम
बिजली निगम के अधिकारियों ने बताया कि पिछले वर्ष फतेहाबाद और टोहाना में भी फर्जी एएलएम को पकड़ा गया था। जिसके बाद उनसे वेतन की रिकवरी भी की गई थी। फतेहाबाद के एक कर्मचारी ने साढे़ चार लाख रुपये की वसूली की गई और अन्य कर्मचारियों से भी पैसा वसूला जा रहा है।

कार्यकारी अभियंता एसके सिंह ने बताया कि पुलिस में दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करा दिया गया है। दोनों कर्मचारियों को सस्पेंड भी किया जा चुका है। उनसे वेतन की रिकवरी करने की प्रक्रिया भी जल्द शुरू की जाएगी। निगम की गाइड लाइन के आधार पर तय किया जाएगा कि दोनों कर्मचारियों से कितना पैसा वसूला जाना है।
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