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अग्रोहा धाम सजकर तैयार: देश भर से जुटेंगे लोग, हिसार से मेले के लिए श्रद्धालुओं के लिए निशुल्क चलेंगी 50 बसें

Sat, 24 Oct 2026 12:53 PM IST
Naveen संवाद न्यूज एजेंसी, अग्रोहा (हिसार)

सार

वर्तमान अग्रोहा धाम का निर्माण कार्य 1976 में शुरू हुआ था और 1984 में मुख्य मंदिर बनकर तैयार हुआ। इस धाम के तीन मुख्य भाग हैं, बीच में कुलदेवी मां महालक्ष्मी का मंदिर, पूर्वी हिस्से में महाराजा अग्रसेन का मंदिर और पश्चिमी हिस्से में मां सरस्वती का मंदिर स्थित है।
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अग्रोहा धाम - फोटो : संवाद
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विस्तार
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आस्था, अध्यात्म, संस्कृति और सामाजिक समरसता का संदेश देने वाले अग्रोहा धाम में 43वें भव्य मेले को लेकर उत्सव का माहौल है। मेले की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए धाम को भव्य रूप दिया गया है। 25 अक्तूबर से होने वाले इस आयोजन में देशभर से लाखों श्रद्धालुओं के उमड़ने की उम्मीद है। महाराजा अग्रसेन के आदर्शों, सेवा और सामाजिक एकता की भावना को समर्पित यह मेला अग्रवाल व वैश्य समाज की आस्था का प्रमुख केंद्र है।

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आयोजन में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों की छटा भी देखने को मिलेगी। देश-विदेश के राजनेताओं, संत-महात्माओं और नामचीन कलाकारों की उपस्थिति इस आयोजन की गरिमा बढ़ाएगी। आस्था, परंपरा और सामाजिक सद्भाव के संगम के रूप में अग्रोहा धाम एक बार फिर भक्ति और उत्साह के रंग में रंगने को तैयार है। मेले का मुख्य आकर्षण दोपहर 12 से 3 बजे तक आयोजित होने वाला भव्य सम्मेलन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम होगा। इसके साथ ही परिसर में ट्रेड फेयर भी लगेगा। जिसमें विभिन्न प्रकार की स्टॉलें आकर्षण का केंद्र बनेंगी। 

श्रद्धालुओं के लिए विशेष इंतजाम 
लाखों की संख्या में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाके लिए आयोजकों द्वाराचाक-चौबंद प्रबंध किए गए हैं। श्रद्धालुओं कीआवाजाही के लिए 50 नि:शुल्क बसें चलाई जाएंगी, ताकि दूर-दराज से आने वाले लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। कई राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए ठहरने का भी प्रबंध किया गया है। देश भर में मेले के प्रचार-प्रसार और श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए 100 भव्य स्वागत द्वार सजाए गए हैं।
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मेले की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए 700 सेवादारों की तैनाती की है। कार्यक्रम में महामंडलेश्वर कुमार स्वामी के अलावा, हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता, हरियाणा के कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल और पंजाब के कैबिनेट मंत्री वीरेंद्र गोयल शामिल होंगे।  पूर्व सांसद डॉ. सुभाष चंद्रा, हिसार की विधायक सावित्री जिंदल तथा भाजपा संगठन अंजनी त्रिवेदी भी अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगे। ईडब्ल्यूएस संस्था के अध्यक्ष सजल जैन ने बताया कि अग्रवाल समाज की मांग पर प्रसिद्ध हरियाणवी कलाकार मासूम शर्मा भी आएंगे।  

अग्रोहा धाम के राष्ट्रीय अध्यक्ष बजरंग गर्ग ने कहा कि अग्रवाल समाज ने हमेशा इतिहास में भागीदारी जैसे दानवीरों के नक्शे कदम पर चलकर जनहित, राष्ट्रहित और धर्म की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च समर्पित किया है। उन्होंने समाज के प्रत्येक वर्ग से आह्वान किया कि वे महाराजा अग्रसेन के बताए मार्ग पर चलें।

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मेले के मिनट-दर-मिनट कार्यक्रम

  •  सुबह 5:00 बजे: शक्ति सरोवर में पवित्र स्नान के साथ मेले का शुभारंभ होगा।
  • दोपहर 12:00 बजे से 3:00 बजे तक: मुख्य सम्मेलन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन।
  • शाम 6:00 बजे: शक्ति सरोवर स्नान।
  • शाम 7:00 बजे: सभी महिलाओं में भव्य महाराजश्री और विशेष पूजा-अर्चना।
  • रात 8:00 बजे: महिलाओं द्वारा भव्य कलश यात्रा।
  • रात 9:00 बजे: छप्पन भोग और सम्मान समारोह का वितरण।
  • रात 9:30 बजे: विशाल भंडारे की शुरुआत।
  • रात 10:15 बजे: मुख्य ध्वजारोहण।
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अग्रोहा धाम ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व

महाराजा अग्रसेन की राजधानी: यह प्राचीन नगर लगभग 5,000 साल पहले महाराजा अग्रसेन की राजधानी हुआ करता था। अग्रोहा को अग्रवाल और वैश्य समुदाय की उत्पत्ति और पूर्वजों की भूमि माना जाता है। महाराजा अग्रसेन के शासनकाल में यहां एक अनूठी परंपरा थी कि जब भी कोई नया परिवार बसने आता था तो सभी नगरवासी उसे रहने के लिए  एक ईंट और एक मुद्रा (सिक्का) भेंट करते थे  जिससे वह अपना घर और व्यापार शुरू कर सके।

प्राचीन काल में अग्रोहा तक्षशिला-मथुरा व्यापार मार्ग पर एक अत्यंत समृद्ध और संपन्न व्यापारिक केंद्र था। बताया जाता है कि ऋषि गार्गा और महाराजा अग्रसेन के मार्गदर्शन में यहीं पर अग्रवाल समाज के 18 गोत्रों की स्थापना हुई थी। वर्तमान अग्रोहा धाम का निर्माण कार्य 1976 में शुरू हुआ था और 1984 में मुख्य मंदिर बनकर तैयार हुआ। इस धाम के तीन मुख्य भाग हैं, बीच में कुलदेवी मां महालक्ष्मी का मंदिर, पूर्वी हिस्से में महाराजा अग्रसेन का मंदिर और पश्चिमी हिस्से में मां सरस्वती का मंदिर स्थित है। इसके पीछे 12 ज्योतिर्लिंगों के साथ रामेश्वर धाम और 41 पवित्र नदियों के जल से युक्त सरोवर बना है।
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