महाराजा अग्रसेन की राजधानी: यह प्राचीन नगर लगभग 5,000 साल पहले महाराजा अग्रसेन की राजधानी हुआ करता था। अग्रोहा को अग्रवाल और वैश्य समुदाय की उत्पत्ति और पूर्वजों की भूमि माना जाता है। महाराजा अग्रसेन के शासनकाल में यहां एक अनूठी परंपरा थी कि जब भी कोई नया परिवार बसने आता था तो सभी नगरवासी उसे रहने के लिए एक ईंट और एक मुद्रा (सिक्का) भेंट करते थे जिससे वह अपना घर और व्यापार शुरू कर सके।
प्राचीन काल में अग्रोहा तक्षशिला-मथुरा व्यापार मार्ग पर एक अत्यंत समृद्ध और संपन्न व्यापारिक केंद्र था। बताया जाता है कि ऋषि गार्गा और महाराजा अग्रसेन के मार्गदर्शन में यहीं पर अग्रवाल समाज के 18 गोत्रों की स्थापना हुई थी। वर्तमान अग्रोहा धाम का निर्माण कार्य 1976 में शुरू हुआ था और 1984 में मुख्य मंदिर बनकर तैयार हुआ। इस धाम के तीन मुख्य भाग हैं, बीच में कुलदेवी मां महालक्ष्मी का मंदिर, पूर्वी हिस्से में महाराजा अग्रसेन का मंदिर और पश्चिमी हिस्से में मां सरस्वती का मंदिर स्थित है। इसके पीछे 12 ज्योतिर्लिंगों के साथ रामेश्वर धाम और 41 पवित्र नदियों के जल से युक्त सरोवर बना है।