एचएयू द्वारा आयोजित किसान मेले के पहले दिन शुक्रवार को बड़ी संख्या में किसान मेला देखने पहुंचे। किसान मेले को लेकर इतने उत्साहित थे कि वे सुबह 6 बजे ही मेले में आना शुरू हो गए थे। हालांकि कुछ किसान बीज लेने के लिए सुबह साढ़े पांच बजे ही लाइन में लग गए थे, जिससे एक बार फिर किसानों की बीज संबंधी समस्या सामने आई। हालांकि किसानों ने मेले का पूरा आनंद लिया।
कड़ी धूप और गर्मी के बावजूद किसानों का उत्साह कम नहीं हुआ। मेले में करीब 200 स्टॉलें लगाई गई थीं। प्रवेश के बाद दोनों और एचएयू और जीजेयू की स्टॉलें लगी हुई थी, जिनमें 40 स्टालें एचएयू और लुवास की 12 स्टालों ने किसानों को खूब आकर्षित किया।
कहीं मौसम संबंधी जानकारी तो कहीं पशुओं के चारे संबंधी तो कहीं पर नई किस्म की जानकारी लेते किसान नजर आ रहे थे। एचएयू और लुवास की प्रत्येक स्टॉल किसानों को उत्साहित कर रही थी। इसके बाद प्राइवेट कंपनियों के बीजों और कृषि यंत्रों की स्टॉल लगी हुई थी। किसान नए कृषि यंत्रों को निहार और परख रहे थे, तो कहीं बीज कंपनियों की स्टॉलों पर सबसे बेहतर बीज ढूंढ रहे थे। इसके बाद किसानों ने गोहाना की जलेबी का स्वाद लिया और पंडाल में रागिनी सुनी। शनिवार को मेले का दूसरा व आखिरी दिन होगा।
प्याज ओर घीया की नई किस्में
किसान मेले के दौरान घीया की दो ओर प्याज की एक नई किस्म एचएयू के सब्जी विज्ञान विभाग द्वारा प्रदर्शित की गई। नई खोजी गई इन किस्मों में घीया की एचबीजीएच 35 और जीएच 22 तथा प्याज की एचओ 4 किस्म है। सभी किस्मों की अपनी अपनी विशेषता हैं।
घीया की किस्म एचबीजीएच 35 साइज में छोटी (बोनी) है। सहायक वैज्ञानिक डॉ. धर्मबीर ने बताया कि प्याज की इस नई किस्म एचओ 4 को प्याज की अन्य किस्मों से अधिक समय तक भंडारण किया जा सकता है। इसके अलावा इस किस्म से उपज भी अधिक होगी और प्याज में तीखा भी अन्य प्याज की अपेक्षा कम होगा। हालांकि उपरोक्त किसी भी किस्म का बीज अभी तक नहीं आया है। वैज्ञानिकों के अनुसार अगले एक साल में किसानों को इन किस्मों का बीज उपलब्ध करवा दिया जाएगा। इसके अलावा एचएयू द्वारा बाजरे की नई एवं उन्नत किस्म एचएचबी 272 भी प्रदर्शित की गई। हालांकि इस किस्म का बीज भी किसानों को अगले एक साल के बाद ही उपलब्ध हो पाएगा।
जल्दी और बीमारी रहित पौध ऐसे करें तैयार
किसान मेले में एचएयू के सब्जी विज्ञान विभाग द्वारा किसी भी पौध को बीमारी रहित और जल्दी तैयार करने की नई विधि को भी प्रदर्शित किया गया। इसके अनुसार कॉकपिट में पौध तैयार की जाती है। वैज्ञानिकों के मुुताबिक परलाइट, वर्मीकुलाइट के साथ नारियल के चूरे का मिश्रण तैयार कर कॉकपिट में डाला जाता है। नारियल चूरे के तीन हिस्से और परलाइट, वर्मीकुलाइट के एक हिस्से को मिलाकर यह मिश्रण तैयार किया जाता है।
वर्मीकुलाइट और परलाइट एक तरह के बहुत हल्के पत्थर होते हैं, जिससे जमीन हल्की रहती है। इनसे वातावरण अच्छा रहता है। कम पानी में ज्यादा देर तक नमी रहती है और पौध में किसी भी प्रकार की कोई बीमारी नहीं लगती। यह पौध जल्दी भी तैयार हो जाती है। जब कॉकपिट को इससे निकाला जाता है। तो मिश्रण इसके साथ चिपका हुआ आता है। जिससे जड़ के उखड़ने का खतरा नहीं होता। इसके बाद इसे अन्य जगह पर लगाकर पौधा तैयार किया जा सकता है।
पशुओं की पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन
लुवास द्वारा बनाई गई पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन भी मेले में प्रदर्शित की गई। इससे पशु में बच्चेदानी में होने वाली किसी भी समस्या जैसे ट्यूमर, गांठ, मवाद, बच्चे जुड़वा है या जिंदा है या मृत आदि चीजों का पत्ता लगाया जा सकता है। पहले किसी भी बीमारी का पता लगाने में तीन चार महीने लग जाते था। लेकिन अब 30 से 55 दिन के भीतर किसी भी बीमारी का पता लगाया जा सकता है।
पशुओं के लिए ऐसे बनाएं हरे चारे का आचार
भविष्य में पशुओं के चारे की कमी न हो इसके लिए साइलेज सिस्टम को अपनाया जा सकता है। लुवास द्वारा लगाई गई स्टॉल में दिखाया गया कि हरी फसल को काटकर ऑक्सीजन रहित अवस्था में जमीन के नीचे संरक्षित किया जा सकता है। इसे साइलेज या हरे चारे का आचार भी कहा जाता है। वैज्ञानिक डॉ. सज्जन सिहाग ने बताया कि साइलेज की गुणवत्ता लगभग हरे चारे के बराबर ही होती है। इसलिए जब हरा चारा उपलब्ध न हो तो पशुओं को खिलाया जा सकता है।
ये किसान हुए सम्मानित
मेले में प्रदेश के विभिन्न जिलों के प्रगतिशील किसानों को खेतीबाड़ी में उनकी विशिष्ट उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया। सम्मानित किए गए इन किसानों में सुखविंद्र सिंह (अंबाला), मनीराम (रेवाड़ी), अजय कुमार (भिवानी), देवराज (फरीदाबाद), सुखविंद्र सिंह (फतेहाबाद), परमिंद्र सिंह (हिसार), सुबेर सिंह (जींद), कमला देवी (झज्जर), विकास चौधरी (करनाल), सतपाल (कैथल), हरपाल सिंह बाजवा (कुरुक्षेत्र), कर्ण सिंह (महेंद्रगढ़), चौधरी देवी लाल (मंडकोला), जसबीर सिंह (पंचकूला), प्रीतम सिंह (पानीपत), रणधीर सिंह (रोहतक), कमलेश नैन (सिरसा), रमाकांत त्यागी (सोनीपत) तथा नोरती राम (यमुनानगर) शामिल थे।
ऑन लाइन मार्केटिंग के लिए किसान को स्पेशल सम्मान
सिरसा से आए किसान कमलेश नैन को कृषि मंत्री ओपी धनखड़ ने 21 हजार रुपये देकर सम्मानित किया। इस किसान को अपने कृषि उत्पादों की ऑन लाइन मार्केटिंग एशिया के अन्य देशों में करने के कारण सम्मानित करने के लिए मंच पर बुलाया गया था। किसान द्वारा ऑनलाइन मार्केटिंग किए जाने से कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ खासा प्रभावित हुए और उन्होंने अपने निजी कोष से किसान को 21 हजार रुपये पुरस्कार स्वरूप देने की घोषणा की।
कहीं पानी नहीं तो कहीं बीज ने दे दिया धोखा
कृषि मंत्री ओपी धनखड़ के सामने कई किसानों ने अपना दुखड़ा रोया। एक किसान ने मंच पर जाकर कृषि मंत्री से बीज नहीं मिलने की समस्या सुनाई। इसके बाद एक अन्य किसान ने कृषि मंत्री के संबोधन के समय उनके पास जाकर कहा कि खेतों में पानी पहुंचा दो। किसान अपने आप खुशहाल हो जाएगा।
आदमपुर से आए एक किसान ने कहा कि मंत्री जी मैंने नरमे का बीज लेकर लगाया था। लेकिन बीज घटिया निकल गया। पौधे तो हो गए लेकिन कोई फल नहीं आया। कृषि मंत्री ने सभी समस्याओं के समाधान के लिए आश्वासन दिया।