जिले में मंगलवार को 928 से नए कोरोना संक्रमित मरीज मिले हैं। 2 मई के बाद पहली बार 1000 से कम केस मिले हैं। कोरोना से ठीक होकर 1028 से अधिक मरीज घर लौटे हैं। सप्ताह भर बाद रिकवरी रेट में भी उछाल आया है। अस्पतालों में भर्ती 16 मरीज संक्रमण से जिंदगी की जंग हार गए।
अब स्वास्थ्य विभाग द्वारा कंटेनमेंट जोन में लोगों की रैपिड किट से जांच में अधिक जोर दिया जा रहा है। विभाग का तर्क है कि इससे मरीजों की जल्द पहचान हो जाती है। संक्रमण का पता लगने पर उसकी हिस्ट्री जुटाने में भी बहुत कम मुश्किल हो जाता है। ऐसे में मरीज को रिपोर्ट के लिए अस्पताल के चक्कर नहीं लगाने पड़ते और उनको रिपोर्ट भी समय में मिल जाती है। इससे पहले शुरुआत में स्वास्थ्य विभाग बहुत कम लोगों के रैपिट किट से टेस्ट कर रहा था। इसका कारण बताया जा रहा है कि रैपिड किट से जांच में पॉजिटिव रिपोर्ट को ही अधिक महत्ता दी जाती है, जबकि निगेटिव रिपोर्ट आने पर आरटीपीसीआर टेस्ट के लिए भी सैंपल लिया जाता है। ऐसे में यह प्रक्रिया काफी लंबी चलती है इसलिए अब दोबारा आरटीपीसीआर टेस्ट की बजाय रैपिड किट पर अधिक विश्वास बताया जा रहा है, जिस पर पहले विभाग बहुत कम विश्वास करता था। हाल ही में स्वास्थ्य विभाग के पास 10,000 रैपिड किट आई हैं। जिनका इस्तेमाल अधिकतर कंटेनमेंट जोन में ही किया जा रहा है। इसके लिए सभी फील्ड टीमों को जरूरत के मुताबिक रैपिड किट दे दी गई है।
एक मरीज की होम आइसोलेट में मौत
शहर के मॉडल टाउन क्षेत्र में मंगलवार को एक मरीज की होम आइसोलेट में मौत हो गई। इसके बाद मृतक के परिजनों ने इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को दी सूचना पाकर विभाग की होम आइसोलेट टीम मौके पर पहुंची। शव का अंतिम संस्कार करवाया। होम आइसोलेट में कई मरीजों की मौत हो चुकी है, जिन्हें विभाग द्वारा बाद में अपडेट किया जाता है।
77.88 प्रतिशत पर पहुंचा रिकवरी रेट
जिले में कोरोना से ठीक होने वाले मरीजों का रिकवरी रेट 77.88 प्रतिशत पर पहुंच गया है, जो अच्छे संकेत हैं। मंगलवार को मिले केस को मिलाकर संक्रमित मरीजों का आंकड़ा 42162 हो गया है। इसके चलते 8691 सक्रिय मरीज हैं। अब तक 32836 मरीज कोरोना से जंग जीतकर घर लौट चुके हैं।
कोविड-19 के 13 शवों का करवाया अंतिम संस्कार
नगर निगम की ओर से यूनियन प्रधान प्रवीण कुमार की निगरानी में उनकी टीम ने मंगलवार को शहर के ऋषि नगर स्थित श्मशान घाट में कुल 13 कोविड-19 शवों का अंतिम संस्कार करवाया। इनमें से कुछ मृतक जिले के निवासी और कुछ बाहरी राज्य या जिलों के रहने वाले थे।