हिसार। सरकार ने बिजली निगम के गलत आंकड़े पेशकर 4,800 करोड़ रुपये का घाटा दिखाया है। इसकी आड़ में बिजली निगम को निजी हाथों में सौंपने की साजिश रची जा रही है। जबकि उन आईएएस अधिकारियों को कोई नहीं पूछ रहा है, जिनके कार्यकाल में बिजली निगम को घाटे में दिखाया है। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दूबे ने यह बात कही। वे शनिवार को ऑनलाइन माध्यम से गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय में आयोजित हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन (एचपीईए) की द्विवार्षिकी केंद्रीय कार्यकारिणी के चुनाव कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा, आईएएस अधिकारियों के नेतृत्व में ही बिजली निगम की योजनाएं व रणनीतियां तैयार की जाती हैं। इन्हें कोई नहीं पूछता कि किन कारणों से बिजली निगम को घाटा पहुंचा है। घाटा पहुंचा है तो ऐसे अधिकारियों के खिलाफ सख्त एक्शन की जरूरत है। दूबे ने कहा कि फेडरेशन द्वारा ऐसे अधिकारियों की लिस्ट तैयार की जा रही है, जिनके कार्यकाल में सरकार ने बिजली निगम को घाटे के तौर पर दिखाया है। साथ ही सरकार से मांग की जाएगी कि ऐसे अधिकारियों पर भी सख्त कदम उठाया जाए।
50,000 कर्मचारियों को रोजगार से हाथ धोना पड़ेगा
निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र लांबा ने बताया कि बिजली निगम का निजीकरण होता है तो करीब 50,000 कर्मचारियों को रोजगार से हाथ धोना पड़ेगा। क्योंकि निगम में अनुबंध के आधार पर करीब 50,000 कर्मचारी लगे हुए हैं, जिनका मार्च 2025 में अनुबंध भी खत्म होने वाला है। निजी हाथों में बिजली निगम को सौंपा जाता है तो वे अपने हिसाब से नए कर्मचारियों को रोजगार देगी।