यदि मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो मुश्किलें भी बाधा नहीं बन पातीं। ऐसा ही कर दिखाया है आजाद नगर में रह रहे पैरा एथलीट अजय ने। चारा काटते समय दो बार मशीन में हाथ आने से अजय के बाएं हाथ का पंजा कट गया, लेकिन उसने हौसला नहीं तोड़ा और अपना संघर्ष बरकरार रखा। हाल ही में 24 से 27 मार्च तक बंगलूरू में आयोजित हुई पैरा एथलेटिक्स की लंबी कूद स्पर्धा में अजय ने स्वर्ण पदक जीता है।
अजय मूलरूप से उकलाना कस्बे के नहला गांव का रहने वाला है। वह पिछले कई सालों से आजाद नगर में अपने दोस्त भूपेंद्र सिंह के पास रह रहा है और साई के गिरी सेंटर में सेवानिवृत्त कोच ओमप्रकाश के पास प्रशिक्षण ले रहा है।
राष्ट्रीय प्रतियोगिता में अब तक जीत चुका छह स्वर्ण पदक
एक हाथ का पंजा कटा होने के बावजूद अजय ने न केवल बेहतरीन प्रदर्शन किया, बल्कि वह राष्ट्रीय प्रतियोगिता में 12 पदक भी जीत चुका है। इनमें छह स्वर्ण, तीन रजत और तीन कांस्य पदक शामिल हैं। अजय का अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भी बेहतरीन प्रदर्शन रहा है। अजय के पिता अजीत सिंह किसान हैं, जबकि माता मुन्नी देवी गृहिणी हैं।
पहले कबड्डी खेलता था अजय
अजय बताता है कि स्कूल समय से ही वह कबड्डी खेलता था, लेकिन वर्ष 2009 और 2018 में दो बार चारा काटते समय मशीन में आने के कारण उसका एक हाथ का पंजा कट गया था। वर्ष 2010 में अजय ने पैरा एथलेटिक्स में खेलना शुरू कर दिया। खास बात है कि पिछले पांच-छह साल से अजय राष्ट्रीय प्रतियोगिता में लगातार पदक जीत रहा है।
प्रमुख उपलब्धियां
- 2016-17 में राष्ट्रीय पैरा एथलेटिक की लंबी कूद में स्वर्ण पदक।
- 2018-19 में राष्ट्रीय पैरा एथलेटिक की लंबी कूद में स्वर्ण और ट्रिपल जंप में रजत पदक।
- 2020-21 में राष्ट्रीय पैरा एथलेटिक की लंबी कूद में स्वर्ण पदक।