हिसार। गर्भावस्था के दौरान तनाव से महिलाओं में चिड़चिड़ापन, गुस्सा और बीपी अनियंत्रित होने की समस्या हो सकती है। जिला नागरिक अस्पताल में जांच के लिए आने वाली 100 गर्भवती महिलाओं में से करीब 35 प्रतिशत में तनाव के लक्षण मिल रहे हैं। इसका असर गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। सुरक्षित प्रसव के लिए महिलाओं को तनावमुक्त रखना जरूरी है।
जिला अस्पताल के स्त्री रोग विभाग में हर महीने 40 से 50 प्रसव होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, चिंता के कारण बीपी नियंत्रित रखने में परेशानी हो सकती है। गर्भवती महिलाओं को नियमित जांच करवानी चाहिए। खासकर पहली बार मां बनने वाली महिलाओं को परिवार का सहयोग मिलना जरूरी है। तनाव महसूस होने या व्यवहार में बदलाव आने पर मनोचिकित्सक से सलाह और काउंसिलिंग लेनी चाहिए।
प्रसव के बाद भी बढ़ सकता है तनाव
विशेषज्ञों के अनुसार, 7 से 20 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं में तनाव के गंभीर लक्षण देखने को मिलते हैं। प्रसव के बाद भी 10 से 20 प्रतिशत महिलाओं में तनाव बढ़ सकता है और व्यवहार में अचानक बदलाव आ सकता है।
गंभीर लक्षण दिखें तो लें चिकित्सकीय मदद
तनाव गंभीर होने पर महिला खुद को या बच्चे को नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसी स्थिति में परिवार के सदस्य विशेष ध्यान रखें। यदि प्रसव के बाद महिला का व्यवहार हिंसक हो या बच्चे की सुरक्षा को लेकर आशंका हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें। नवजात की सुरक्षा सुनिश्चित करें और स्तनपान परिवार के किसी सदस्य की निगरानी में करवाएं।
स्वस्थ रहने के लिए अपनाएं ये उपाय
- रोजाना सात से आठ घंटे की नींद लें।
- सकारात्मक सोच रखें और छोटी-छोटी बातों में खुशियां तलाशें।
- सादा खान-पान अपनाएं।
- सर्दियों में धूप न मिलने पर घर के अंदर टहलें।
- डॉक्टर की सलाह से हल्का व्यायाम करें और निर्देशानुसार दवा लें।
- नियमित जांच व शारीरिक साफ-सफाई का ध्यान रखें।
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं का तनावमुक्त रहना जरूरी है। परिवार को उनकी देखभाल करनी चाहिए। तनाव के लक्षण दिखाई देने पर मनोचिकित्सक से काउंसिलिंग लें।
- शालू ढांडा बूरा, काउंसलर, मानसिक रोग विभाग, सामान्य अस्पताल, हिसार।
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