हिसार। सातरोड कलां में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) का नया भवन लगभग तैयार है लेकिन अवैध कब्जों के कारण चहारदीवारी का निर्माण अधूरा है। इसी वजह से पीएचसी को नए भवन में शिफ्ट नहीं किया जा सका है। ग्रामीणों ने मांग की है कि स्वास्थ्य विभाग के नाम दर्ज जमीन से कब्जे हटवाकर कार्य जल्द पूरा कराया जाए।
गांव का पुराना पीएचसी भवन कंडम घोषित होने के बाद करीब आठ वर्षों से यह चौपाल में संचालित हो रहा है। पंचायत द्वारा उपलब्ध कराई गई 4.5 एकड़ जमीन पर लगभग 5.5 करोड़ रुपये की लागत से नया भवन तैयार किया गया है। हालांकि करीब 33 मरले भूमि पर कब्जों के चलते चहारदीवारी का काम रुका हुआ है। ग्रामीणों ने इसे हटाने की मांग उठाई है। ग्रामीणों के अनुसार पीएचसी में फिजिशियन के दो पद स्वीकृत हैं जिनमें से एक अभी खाली है जिससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
निकासी व्यवस्था भी बनी समस्या
ग्रामीणों ने सातरोड-गंगवा ड्रेन को पक्का करने और गांव के गंदे पानी की उचित निकासी की व्यवस्था करने की मांग की है। उनका कहना है कि दूषित पानी तालाबों में जमा हो जाता है, जिससे ओवरफ्लो की स्थिति बनती है। ऐसे में तालाबों को ड्रेन से जोड़ा जाए। साथ ही डोभी तालाब के प्रस्तावित सुंदरीकरण कार्य को भी शीघ्र शुरू करने की मांग की गई है।
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चहारदीवारी बनी हैंडओवर में बाधा
- सिर्फ चहारदीवारी के कारण पीएचसी के नए भवन के हैंडओवर का काम नहीं हो पा रहा है। स्वास्थ्य विभाग इन कब्जों को हटवाकर जल्द से जल्द चहारदीवारी का कार्य पूरा करवा और इस भवन को अपनी अधीन लेकर ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाए। इसके अलावा गांव में कुछ हिस्से में पेयजल की भी समस्या है। - मंजीत पूनिया, ग्रामीण
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पीएचसी का काम लगभग पूरा हो चुका है लेकिन चहारदीवारी न बनने से ग्रामीणों को इसका फायदा नहीं मिल रहा है। पीएचसी सामान्य चौपाल में 8 साल से चल रही है। अगर पीएचसी यहां शिफ्ट होगी तो ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी। - अमित पूनिया, बीडीसी मेंबर
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गांव को तालाबों को ड्रेन से जोड़ा जाए ताकि इनके ओवरफ्लो होने पर गंदा पानी ड्रेन में जा सके। वैसे तो नियमानुसार तालाबों में दूषित पानी नहीं डाला जा सकता है। गांव के तालाबों का सुंदरीकरण करवाया जाए। सातरोड-गंगवा ड्रेन को पक्का करवाया जाए। - आजाद पूनिया, ग्रामीण
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गांव के एक हिस्से में पानी की काफी समस्या है। कई दिनों तक पेयजल की सप्लाई नहीं की जाती। जनस्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी अपनी मनमानी दिखाते हुए अपनी मर्जी से पेयजल सप्लाई देते हैं। - रविंद्र पूनिया
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सातरोड कलां गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कार्य पिछले कई महीनों से अटका पड़ा है। भवन तैयार होने के बावजूद ग्रामीणों को बेहतर इलाज के लिए हिसार या आसपास के कस्बों में जाना पड़ता है। गांव में करीब 30 हजार की आबादी है लेकिन स्वास्थ्य सेवाएं न के बराबर हैं। आपात स्थिति में मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता। ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन से गुहार लगाई लेकिन अभी तक समस्याओं का इलाज नहीं हो सका है।