जनस्वास्थ्य विभाग का ऋषि नगर में बना एसटीपी।
हिसार। शहर में एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) के पानी की जांच के लिए लैब का निर्माण किया जाएगा। जनस्वास्थ्य विभाग ने लैब के भवन निर्माण के लिए टेंडर अलॉट कर दिया है। जल्द ही भवन का निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
बता दें कि वर्तमान में शहर में जनस्वास्थ्य विभाग की लैब में पानी की जांच की सुविधा उपलब्ध है। लैब में पानी की केमिकल व बैक्टीरियल जांच की जाती है। मगर विभाग के पास एसटीपी की लैब नहीं है, जिस कारण विभाग एसटीपी के पानी की जांच नहीं कर पाता।
45 लाख रुपये से बनाया जाएगा भवन
एसटीपी लैब के लिए एक अलग से भवन बनाया जाएगा। यह भवन पूरी तरह से वातानुकूलित सुविधा से युक्त होगा। इसके निर्माण पर 45 लाख रुपये की लागत आएगी। 3 माह में इस भवन का निर्माण करना होगा। लैब के लिए कुल 80 लाख रुपये का बजट मंजूर हुआ है। बाकी बचे 35 लाख रुपये लैब के उपकरणों पर खर्च किए जाएंगे।
यूं जरूरी है एसटीपी के पानी की जांच
एसटीपी के पानी में कई प्रकार के जहरीले रसायन हो सकते हैं, जिनमें भारी धातुएं, कार्बनिक रसायन और गैर-जैवनिम्नीकरणीय प्रदूषक शामिल हैं। इनसे कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का भी खतरा रहता है। चूंकि शहर में बने सभी एसटीपी के पानी को साफ करके उसका इस्तेमाल खेतों में सिंचाई के लिए किया जा रहा है। ऐसे में समय-समय पर एसटीपी से निकलने वाले पानी की जांच जरूरी हो जाती है।
15 और मानकों को एनएबीएल से प्रमाणित करवाने के लिए किया जाएगा आवेदन
फिलहाल विभाग की पानी जांच की लैब 6 मानकों पर एनएबीएल (नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज) से प्रमाणित है। अब लैब की तरफ से 15 और मानकों को एनएबीएल से प्रमाणित करवाने के लिए आवेदन किया जाएगा। दरअसल एनएबीएल भारत में एक स्वायत्त निकाय है जो परीक्षण और अंशांकन प्रयोगशालाओं को मान्यता देता है। यह सुनिश्चित करता है कि ये प्रयोगशालाएं अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करती हैं। इससे उनके परीक्षण परिणामों की विश्वसनीयता और विश्वसनीयता बढ़ती है।