हांसी के विश्राम गृह के बाहर खड़े शिकायतकर्ता व अन्य।
हांसी (हिसार)। भाटला सामाजिक बहिष्कार प्रकरण में जांच के लिए वीरवार को उत्तर प्रदेश के सेवानिवृत्त डीजीपी कमलेंद्र प्रसाद, वीसी गोयल के साथ दो पूर्व डीएसपी जांच के लिए पहुंचे। चार सदस्यीय टीम ने करीब दो घंटे तक गांव के माहौल के बारे में ग्रामीणों से हकीकत जानी। साथ ही जानने का प्रयास किया कि गांव में अभी भी अनुसूचित समाज का बहिष्कार है या नहीं। बहिष्कार की मुनादी करने वाले चौकीदार से भी बातचीत की। जांच के बाद रिपोर्ट सर्वोच्च न्यायालय में पेश की जाएगी।
सेवानिवृत्त डीएसपी के गांव में जाने के लिए पुलिस ने वाहन का बंदोबस्त किया। इस दौरान उनके साथ पुलिस व प्रशासन का कोई भी अधिकारी व कर्मचारी नहीं था। पूछताछ के दौरान चौकीदार ने उन्हें बताया कि उसने स्वर्ण समाज के लोगों के कहने पर ही मुनादी की थी। चौकीदार से गांव का माहौल भी पूछा। इसके अलावा गांव में बस स्टैंड, स्कूल, पुलिस चौकी में भी जांच की। वहीं, जिस पानी के नलके पर घटना हुई थी वहां पर का भी निरीक्षण किया।
इस दौरान टीम ने गांव के लोगों से बातचीत की। लोगों से गांव के वर्तमान माहौल के बारे में पूछा। इसके बाद शाम को लोकनिर्माण विभाग के स्थानीय विश्राम गृह में ठहरी टीम के सदस्यों ने मामले में शिकायतकर्ता सहित पीड़ित समाज के लोगों से भी बातचीत की। उनसे पूछा की सामाजिक बहिष्कार के दौरान क्या स्थिति थी और अब क्या स्थिति है। करीब चार घंटे तक लोगों से बातचीत की।
बता दें कि भाटला में 8 वर्ष पहले हुए सामाजिक बहिष्कार प्रकरण के मामले में वीरवार को फिर से जांच शुरू हुई है। जांच सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद की जा रही है। इसके लिए उत्तर प्रदेश से सेवानिवृत्त डीजीपी कमलेंद्र प्रसाद, वीसी गोयल के साथ दो सेवानिवृत्त डीएसपी बुधवार शाम को जांच के लिए पहुंचे। वह जांच के बाद रिपोर्ट को सर्वोच्च न्यायालय में पेश करेंगे।
यह है मामला
गौरतलब है की वर्ष 2017 में गांव भाटला में नलके पर पानी भरने को लेकर स्वर्ण समुदाय के युवकों ने दलित समुदाय के युवकों को चोटें मारी थीं। इस मामले में दर्ज मुकदमे में समझौता न करने पर गांव के स्वर्ण समाज के कुछ लोगों ने भाईचारा कमेटी बनाकर गांव के अनुसूचित जाती के लोगों का मुनादी करवा के सामाजिक बहिष्कार कर दिया था। इस मामले में पीड़ितों ने गांव के स्वर्ण समुदाय के लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराए थे।