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हिंदू हित चिंतक सम्मेलन में वक्ताओं ने जताई चिंता

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सिरसा। विश्व हिंदू परिषद की जिला सिरसा इकाई की ओर से रविवार को श्री सनातन धर्म मंदिर परिसर में हिंदू हित चिंतक सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में सिटीजन वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान आरएसडी बंसल मुख्य अतिथि और सुरेश भारद्वाज व महेश पारिक विशिष्ट अतिथि थे। अध्यक्षता शिक्षा विभाग के पूर्व उपनिदेशक डीडी वर्मा ने की।
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कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान राम-सीता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित किया गया। विभागाध्यक्ष बृजमोहन शर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि वोट की राजनीति ने हिंदू समाज को जाति समुदायों में विभाजित कर दिया और योजनाबद्ध तरीके से हिंदू वर्ग व हिंदू संस्कृति पर आक्रमण किया जा रहा है। मुख्य वक्ता विश्व हिंदू परिषद के क्षेत्रीय संगठन मंत्री कैलाश सिंघल ने कहा कि देश में बांग्लादेशियों की घुसपैठ बहुत बड़ी समस्या है। भारत-बांग्लादेश की खुली सीमा के कारण पांच करोड़ से अधिक बांग्लादेशी देश में घुसपैठ कर चुके हैं। अकेले असम में इनकी तादाद एक करोड़ है, जिनमें से 40 लाख मतदाता बन गए हैं। उन्होंने कहा कि असम के 27 जिलों में से 13 जिले मुस्लिम बाहुल्य बन गए हैं और 3500 गांव ऐसे हैं, जिनमें एक भी हिंदू नहीं है। असम में बांग्लादेशियों ने यूडीएफ नाम से राजनीतिक दल बना रखा है जो मुख्य विपक्षी दल भी है। इन लोगों के कारण सामाजिक संरचना बिगड़ रही है। उन्होंने कहा कि आजादी के समय भारत में मुसलमानों की तादाद तीन करोड़ थी जो बढ़कर 20 करोड़ हो गई है। वहीं बांग्लादेश और पाकिस्तान में हिंदुओं की तादाद पौने तीन करोड़ से घट कर एक करोड़ रह गई है।
अयोध्या जन्मभूमि का जिक्र करते हुए सिंघल ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आने के बावजूद मंदिर निर्माण नहीं हो पा रहा, जिसके लिए हिंदू समाज को संगठित होकर काम करना होगा। उन्होंने गौरक्षा पर जोर देते हुए कहा कि गाय की रक्षा इसलिए बेहद जरूरी है क्योंकि 65 वर्षों से 36 हजार बुचड़खाने काम कर रहे हैं। 20 यांत्रिक कत्लखाने भी मौजूद हैं जिनकी तादाद बढ़ाने की साजिश की जा रही है।
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इससे पूर्व परिषद के मीडिया प्रभारी विजय शर्मा ने विश्व हिंदू परिषद की स्थापना से लेकर अब तक की गतिविधियों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की। कार्यक्रम में मनोज कुमार व प्रदीप रहेजा ने देशभक्ति रचनाएं प्रस्तुत की। अतिथियों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर श्रीगोपाल शास्त्री, डा. हरि प्रसाद, डा. पी. दयाल, यतिंद्र सिंह, सुरेश वत्स भारती, सुभाष बिश्नोई, रामअवतार हिसारिया, सुखवंत कालिया, केके शर्मा, हरिकृष्ण गोयल, बसंत पारिक, हवा सिंह पूनियां, वीपी जिंदल, हरिओम भारद्वाज, गंगाधर वर्मा, डा. दयाकृष्ण महिपाल, दयानंद शर्मा भी मौजूद थे।
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