अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
जाट आरक्षण संघर्ष समिति की महिला विंग की अध्यक्ष निर्मला दहिया के सिविल लाइन थाना पुलिस अरेस्ट वारंट लेकर एचएयू के एटिक डिपार्टमेंट में पहुंची। महिला स्टाफ को साथ लेकर पहुंची पुलिस निर्मला दहिया को गिरफ्तार नहीं कर पाई। मौके पर मौजूद स्टाफ सदस्यों ने उन्हें पुलिस को नहीं ले जाने दिया। दरअसल निर्मला दहिया ने पुलिस से अरेस्ट वारंट दिखाने के लिए कहा। वारंट में निर्मला दहिया का नाम निर्मला और पति का नाम भी गलत था। इतना ही नहीं उसका घर का पता भी गलत था। इस कारण उन्होंने इसे आधार बनाते हुए विरोध कर दिया। विरोध के बाद वहां स्टाफ एकत्रित हो गया। पुलिस को बिना गिरफ्तारी के ही वापस लौटना पड़ा। इस मामले की सूचना जाट आरक्षण संघर्ष समिति के उच्च पदाधिकारियों के पास भी पहुंच गई।
यह था मामला
जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान सदर थाना पुलिस ने मय्यड़ में रोड जाम करने के मामले में 27 जुलाई 2015 को केस दर्ज किया था। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज किया था। अदालत ने इस मामले में पेश होने के लिए कई बार उन्हें समन भेेजा, लेकिन वे नहीं पहुंची। हालांकि निर्मला का कहना है कि उन्हें अभी तक कोई भी समन नहीं मिला। इसी मामले को देखते हुए कोर्ट ने उसके अरेस्ट वारंट जारी कर दिए।
निर्मला दहिया बोलीं, सरकार हड़बड़ाहट में
निर्मला दहिया ने कहा कि वे एचएयू में क्लर्क हैं। वह पिछले तीन साल से किसी कार्यक्रम में भाग नहीं ले रहीं, लेकिन सरकार खुद रोहतक में होने वाली रैली से हड़बड़ाहट में है। इसी के चलते मुझे गिरफ्तार करने का दबाव बना रही है।