हिसार। बाजरे की सरकारी खरीद के दूसरे दिन भी किसान सरकारी एजेंसियों को अपना बाजरा नहीं बेच पाए। मंगलवार को अनाज मंडी में 32 क्विंटल बाजरा आया, जो कि रजिस्टर्ड नहीं था। बाजरे का पंजीकरण न करवा पाने वाले किसानों को प्रति एकड़ के हिसाब से 600 रुपये का नुकसान हो रहा है। बाजरे की खरीद का सरकारी मूल्य 1950 रुपये निर्धारित किया गया है। मजबूरी में किसान प्राइवेट आढ़तियों को 1350 रुपये में अपने बाजरा बेचने को मजबूर हैं। वहीं मंडी में आए किसान बोले- भाई हम नै के बेरा यो रजिस्ट्रेशन के होवै सै। गामां म्ह तो बैरा बी कोनी पाट्या कि सरकार कद रजिस्ट्रेशन करगी।
मंगलवार को धान्सू गांव के दो किसानों ने प्राइवेट आढ़तियों को अपना बाजरा बेचा। इसका मुख्य कारण है कि जिले के करीब 30 प्रतिशत किसान ही बाजरे की फसल को ऑनलाइन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कर पाए हैं। परिणामस्वरूप जिले के करीब 70 प्रतिशत किसान सरकार को अपना बाजरा नहीं बेच पाएंगे। अग्रवाल उत्थान संगठन के प्रदेशाध्यक्ष रोशन लाल ने व संगठन के सदस्यों ने किसानों से बातचीत की। किसानों ने कहा कि हमको को पता ही नहीं की रजिस्ट्रेशन कैसे किया जाता है। न ही हमको इंटरनेट चलाना आता है। बहुत सारे किसानों को पता नहीं चला कि ये स्कीम कब शुरू हुई व कब खत्म हो गई।
बाजरा बेचने के लिए गेट पास से लेकर से सरकारी ऐजेंसी तक प्रक्रिया
अनाज मंडी में सरकारी दर पर अपना बाजरा बेचने के लिए किसानों को एक लंबी प्रक्रिया से होकर गुजरना पड़ रहा है। जो किसान सरकारी ऐजेंसी को अपना बाजरा बेचना चाहता है, उसका एक दिन तो अनाज मंडी की कागजी कार्रवाई में ही निकल जाता है।
. सरकारी एजेंसी को बाजरा बेचने के लिए किसान को सबसे पहले अनाज मंडी के मेनगेट पर एंट्री पास लेना होगा।
. गेट-पास लेने के बाद मार्केट कमेटी में अपनी एंट्री करवानी होगी। अपनी फसल का रजिस्ट्रेशन वेरिफाई करवाना होगा।
. मार्केट कमेटी से वेरिफाई का सबूत लेेकर किसान अपनी फसल को अपने आढ़ती के पास लेकर जाएगा।
. आढ़ती मार्केट कमेेेटी के वेरिफाई किए हुए डॉक्यूमेंटस के अनुसार फसल का तोल करवाएगा।
. तोल करवाने के बाद आढ़ती ई-खरीद पोर्टल पर टोटल फसल का वेट भरके जे. फॉर्म जेनरेट करेगा।
. फिर आढ़ती किसान आई फार्म देगा। आढ़ती ये आई फॉर्म सरकारी एजेंसी मेें जमा करवाएगा। आई फार्म ऐजेंसी में देते ही किसान की फसल सरकार को बिकी हुई मानी जाएगी।
ये बोले किसान
भाई किसानां नै के बेरा यो रजिस्ट्रेशन के होवै सै। गामां म्ह तो बैरा बी कोनी पाट्या कि सरकार कद रजिस्ट्रेशन करगी। अनपढ़ किसान तो जमा मारे गए। सरकार बाजरा लेंदी कोनी, प्राइवेट आढ़ती जमा सस्ता बाजरा लेवै सै।
-सीताराम, किसान धान्सू।
स्कीम का बेरा कोनी लाग्या, रजिस्ट्रेेशन कोनी कराण पाए, ईब सरकारी एजेंसी नू कहवै सै के उनका बाजरा लैवांगे, जिनका रजिस्ट्रेशन हो रैया सै। माहरी तो बिरान माट्टी कर राखी सै। -किरोड़ीमल किसान, धान्सू।
अनाज मंडी में अपना बाजरा बेचने आ रहे किसानों को भारी परेशानियों को सामना करना पड़ रहा है। सरकार अगर किसानों को लाभ पहुंचाना चाहती है तो फसल खरीद के समय लगाई शर्तें को समाप्त करें। इस अनुभवहीन सरकार ने किसान को व व्यापारी को बैकफुट पर ला दिया है। -रोशन लाल गर्ग, प्रदेशाध्यक्ष अग्रवाल उत्थान संगठन।
केवल रजिस्ट्रर्ड किसानों का ही बाजरा खरीदा जाएगा। मंगलवार को सिर्फ 32 क्विंटल बाजरा हमारे पास आया जो की पंजीकृत नहीं था। किसान अपने साथ आधार कार्ड व बैंक खाते की फोटोकॉपी जरूर लेकर आएं। किसान पहले मार्केट कमेटी में जाकर अपनी फसल की रजिस्ट्रेशन वेरिफाई जरूर करवा लें। -समुंद्र सिंह, मैनेजर, दी हिसार को-ऑपरेटिव मार्केटिंग सोसायटी