अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ ने किसानों की आमदनी दोगुनी करने को लेकर टॉप-100 स्टेकहोल्डर्स एग्री मीट-2018 के साथ मंथन किया। मंथन में राज्यमंत्री मनीष ग्रोवर भी शामिल हुए। किसानों से डरे कृषि मंत्री करीब 10 मिनट तक कुर्सियों को गिनते रहे।
कृषि मंत्री ने कहा कि खाद्यान्न के कटोरा हरियाणा को हमें फल-सब्जी के टोकरे में परिवर्तित करना है। समग्र विकास और मिश्रित खेती की ओर बढ़ना होगा। पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन से बताया कि हरियाणा में 91 लाख 75 हजार एकड़ कृषि योग्य भूमि है। इसके माध्यम से 65158 करोड़ रुपये की आमदनी होती है। इसमें पशुपालन की 37 हजार रुपये आय भी शामिल है। 2022 तक किसान की आमदनी को प्रति एकड़ एक लाख रुपये करने के लक्ष्य के साथ काम कर रही है। साधारण खेती से किसान को प्रति एकड़ 20 हजार रुपये प्रतिवर्ष कमाते हैं। सब्जी उगाने वाले किसान 85 हजार रुपये, फलों का उत्पादन करने वाले किसान 90 हजार रुपये, मछली उत्पादक किसान 1.90 लाख रुपये, डेयरी चलाने वाले किसान 2.5 लाख रुपये, फूलों की खेती करने वाले किसान 3.50 लाख रुपये, झींगा मछली के उत्पादक 6.30 लाख रुपये और पोल्ट्री व्यवसाय से जुड़े किसान प्रति एकड़ सवा 13 लाख रुपये प्रति एकड़ की आमदनी ले रहे हैं। किसानों को सुझाव दिया कि वे एक-दो एकड़ की छोटी जोत की खेती न करें। पांच-छह एकड़ में खेती करें अन्यथा, कोई अन्य व्यवसाय शुरू करें। किसानों को एनसीआर की नजदीकी का लाभ उठाना चाहिए। दिल्ली-गुरुग्राम क्षेत्र की मांग के अनुरूप उत्पादन करते हुए मार्केटिंग में माहिर होना चाहिए।
उन्होंने दिल्ली मांगे फ्रेश-हरियाणा पर है क्रश का स्लोगन देते हुए किसानों से 36500 करोड़ रुपये के एनसीआर बाजार का लाभ उठाना होगा। सरकार हकृवि के साथ मिलकर एग्री बिजनेस स्कूल खोल रही है। इसमें किसानों व युवाओं को फसलों की मार्केटिंग के गुर सिखाए जाएंगे। पास 91 लाख समतल उर्वरा भूमि है। हमारे यहां 15 हजार किलोमीटर लंबी 1500 नहरें हैं और 1 करोड़ 20 लाख एकड़ फुट वर्षा के पानी की उपलब्धता है। प्रदेश में 20 लाख दुधारू पशु हैं और हम अपनी खाद्यान्न जरूरतें पूरी करके 13 करोड़ खाद्यान्न हर साल केंद्र को देते हैं।
स्वामीनाथन आयोग की 10 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजे की सिफारिश से आगे बढ़कर प्रति एकड़ 12 हजार रुपये मुआवजे का प्रावधान किया है। भावांतर भरपाई योजना में अब तक 3703 किसान 9218 एकड़ जमीन पंजीकृत कर चुके हैं। हर खेत को पानी देने की योजना शुरू की है। प्रदेश में माइक्रो इरिगेशन योजना शुरू की गई है। इसके तहत 14 पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं। इनमें से आठ चालू हो चुके हैं। अगले वर्ष से हर खंड में कम से कम एक परियोजना के लक्ष्य के साथ प्रदेश में 140 परियोजनाएं शुरू की जाएंगी। किसान समूह बनाकर 50 प्रतिशत भागीदारी के लिए आगे आएं तो सरकार शेष 50 प्रतिशत का भुगतान करके उनके खेतों में यह परियोजना शुरू करवाएगी। प्रदेश में उत्कृष्टता केंद्र खोले जा रहे हैं। प्रत्येक जिले में कम से कम एक केंद्र खोला जाएगा।
हकृवि के कुलपति प्रो. केपी सिंह ने कहा टिश्यू कल्चर लैब स्थापित की जानी चाहिए। लवणीय जल को सिंचाई योग्य बनाना पर काम करने की जरूरत है। प्रदेश में रिसर्च प्रोजेक्ट्स की ग्रांट का प्रावधान होना चाहिए। विमुख हो रही युवा पीढ़ी को खेती से जोड़े रखने की दिशा में भरसक प्रयास होने चाहिए। खेतों में स्प्रे कार्य को आसान बनाने के लिए ड्रोन की सुविधा होनी चाहिए।
कृषि उपनिदेशक को मीटिंग से निकाला
कृषि मंत्री ने मीटिंग शुरू होने से पहले कुर्सियां गिनना शुरू कर दिया। एक के बाद एक लोगों को बाहर निकलना शुरू किया। ओपी धनखड़ ने जिला कृषि उपनिदेशक डॉ. विनोद फौगाट को भी मीटिंग से बाहर कर दिया। कृषि मंत्री बोले, ये नौजवान कौन है, चेक करो, कोई कम-ज्यादा तो नहीं आ गया।
बेचने के समय शुतुरमुर्ग बन जाते हो
कृषि मंत्री बोले कि हरियाणा के किसान उत्पादन तो कर लेते हैं। बेचने के समय शुतुरमुर्ग बन जाते हैं। दुबक जाते हैं। हम हरित क्रांति के बाप हैं। फिर भी हरियाणा को उसका इतना फायदा नहीं मिला। रंग-बिरंगी फैशनेबल सब्जियों की खेती करो। इस मौके पर समय सिंह भाटी, हरियाणा वेयर हाउसिंग कारपोरेशन के चेयरमैन श्रीनिवास गोयल, भाजपा प्रदेश सचिव कर्णसिंह रानौलिया, जिला सचिव लक्ष्मी नारायण उर्फ घोलू गुर्जर आदि उपस्थित थे।