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Hisar News: 72 घंटे का दावा, किसानों को 168 घंटे बाद भी सरसों का भुगतान नहीं

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हिसार। सरकार की ओर से फसल बेचने के 72 घंटे बाद भुगतान करने के दावे फेल हो रहे हैं। हालत यह है कि एक सप्ताह यानी करीब 168 घंटे बाद भी किसानों को सरसों का भुगतान नहीं हो रहा है। हालांकि हैफेड के अधिकारियों का कहना है कि फसल बेचने के 72 घंटे बाद ही किसानों के खाते में राशि भेजी जा रही है। मगर हकीकत कुछ और है।
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उधर, मंडी में एक अप्रैल से सरसों की सरकारी खरीद भी बंद कर दी गई। सरकारी खरीद नहीं होने पर 10 किसान मायूस लौटे। वही, हैफेड मैनेजर संजीव बेरवाल का कहना है कि 30 अप्रैल तक ही सरसों की सरकारी खरीद के आदेश थे। अभी खरीद की तिथि आगे बढ़ाई नहीं है। इस कारण सोमवार को सरसों की सरकारी खरीद नहीं की गई। मंडियों से 8140 क्विंटल सरसों का उठान हो चुका है।
130 क्विंटल गेहूं की हुई सरकारी खरीद
सोमवार को हिसार की नई अनाजमंडी में 1568 क्विंटल गेहूं की आवक हुई। सरकारी एजेंसी की ओर से 130 क्विंटल गेहूं खरीदा गया। जबकि प्राइवेट एजेंसी की ओर से 1190 क्विंटल गेहूं 2126 रुपये से लेकर 2660 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदा गया। हैफेड की ओर से सरसों की सरकारी खरीद बंद कर दी गई। हालांकि मंडी में 3317 क्विंटल सरसों पहुंची थी। प्राइवेट एजेंसी की ओर से 95 क्विंटल सरसों 4500 रुपये से लेकर 4700 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदी गई। मंडी में सोमवार को 1620 क्विंटल गेहूं का उठान हुआ है। जबकि मंडी में अभी 7490 क्विंटल गेहूं का उठान बाकी है।
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25 और 26 अप्रैल को 45 क्विंटल सरसों सरकारी एजेंसी को बेची थी। मगर अभी तक रुपयों का भुगतान नहीं हो पाया है। मजदूरों के पैसे तक नहीं दिए हैं। रोजाना घर पर चक्कर काट रहे हैं। सरकार के आदेश झूठे साबित हो रहे हैं। सरकार को किसानों की तरफ ध्यान देना चाहिए। - राजबीर सिंह, किसान
हर साल सरकार खरीद के 72 घंटे बाद भुगतान करने का दावे करती है। मैंने एक सप्ताह पहले 68 क्विंटल सरसों बेची थी। मगर अभी तक रुपये नहीं आने के कारण परेशानी हो रही है। एक सप्ताह बाद भी भुगतान नहीं हुआ है। अब भुगतान कब होगा यह भी नहीं पता है। - अंतर सिंह, किसान
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