अमर उजाला ब्यूरो
हिसार। नगर निगम प्रशासन को सीसीटीवी देने वाला दानी सज्जन नहीं मिला है। करीब एक महीने पहले नगर निगम कमिश्नर की ओर से बैठक लेने के बावजूद अभी तक न तो कोई व्यक्ति विशेष और न ही संगठन आगे आया है। करीब 25 दिन बाद भी ऐसे हालात होने पर अब उपायुक्त अशोक कुमार मीणा ने खुद संज्ञान लिया है। अब चार सितंबर को उपायुक्त खुद सामाजिक संगठनों, आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों, व्यापारी संगठनों व एनजीओ सदस्यों की बैठक लेकर गुहार लगाएंगे। बैठक की जानकारी देने के लिए उपायुक्त ने निगम कमिश्नर अशोक बंसल को जिम्मेदारी सौंपी है।
विभिन्न चौकों पर 84 सीसीटीवी लगाने का बना था प्लान
सात अगस्त को निगम कमिश्नर अशोक बंसल द्वारा ली गई बैठक में शहर में हो रही आपराधिक घटनाओं की सच्चाई जानने और उन पर अंकुश लगाने के मद्देनजर शहर के विभिन्न चौकों पर 84 सीसीटीवी कैमरे लगाने का प्लान बनाया गया था। कैमरे लगाने के लिए जनभागीदारी बढ़ाने का दावा किया गया था। कमिश्नर ने सीसीटीवी लगाने के लिए चुने गए स्थानों की जानकारी भी संगठनों के सदस्यों के समक्ष रखी थी। मगर अभी तक किसी ने भी सीसीटीवी लगाने की हामी नहीं भरी है।
एक चौक पर कई संस्थाएं मिलकर भी लगवा सकती हैं कैमरे
उस बैठक में निगम कमिश्नर ने यहां तक भी कहा था कि अपने आसपास के चौके पर लगने वाले सीसीटीवी कैमरों के लिए संस्थाएं सहयोग कर सकती हैं। कई संस्थाएं मिलकर किसी एक चौक पर भी सीसीटीवी कमरे लगवा सकती हैं। प्रत्येक दो या तीन चौकों पर लगने वाले सीसीटीवी कैमरों के लिए एक-एक कंट्रोल रूम स्थापित किया जाना है।
पहले से लगे 46 कैमरों में से 29 चालू हालत में
नगर निगम की ओर से 2014 में पार्षद शालू दीवान के प्रयासों से 11 स्थानों पर 46 कैमरे लगाए थे। इनमें राजगुरु मार्केट, तेलियान पुल, गांधी चौक, भगतसिंह चौक, डोगरान मोहल्ला, रेलवे स्टेशन, सुभाष मार्केट, कबीर चौक, कटला रामलीला जैसे मुख्य क्षेत्र शामिल थे। मगर अब स्थिति यह है कि इनमें से मात्र 29 कैमरे ही चल रहे हैं, जबकि 17 खराब पड़े हैं। अब इन खराब कैमरों को ठीक करवाने के लिए भी इलेक्ट्रिकल विंग के जेई की ओर से प्रयास शुरू किए गए हैं।
सांसद की ग्रांट से लगे कैमरों को ढंग से नहीं मिली बिजली सप्लाई
वहीं 2017 में सांसद दुष्यंत चौटाला की ओर से भी 42 कैमरे लगवाए गए थे। इन कैमरों को लगाने का जिम्मा पीडब्ल्यूडी विभाग की इलेक्ट्रिकल डिविजन को सौंपा गया था। उस दौरान कैमरे लगाकर उनके बिजली कनेक्शन स्ट्रीट लाइटों से जोड़ दिए गए। मगर इन कैमरों को बाद में ढंग से बिजली सप्लाई नहीं मिली। इसी कारण इनमें से भी अधिकतर ढंग से काम नहीं कर रहे हैं।