अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
पांच स्थानों पर आयोजित मेगा मॉक ड्रिल में खामियां ही खामियां देखने को मिली। पिछले एक सप्ताह से लगातार मीटिंग के बावजूद प्रशासन का कम्युनिकेशन सही नहीं रहा। घायलों को ले जाने के लिए स्ट्रेचर और एंबुलेंस तक नहीं जुटा सके। हिसार में हुई मॉक ड्रिल में करीब 51 लोग घायल हुए हैं।
वीरवार को जिला प्रशासन ने पांच स्थानों पर मेगा मॉक ड्रिल का आयोजन किया। लघु सचिवालय में भूकंप की सूचना के लिए सायरन बजाते ही भगदड़ मच गई। एडीसी एएस मान सबसे पहले अपने कार्यालय के बाहर निकले। सबको तुरंत बाहर आने की आवाज लगाते हुए बाहर की ओर दौड़े। खुले मैदान में पहुंचने तक उनकी सांसें फूली हुई थीं। कुछ सेकेंड के बाद उपायुक्त अपने कार्यालय से बाहर निकले। एसपी मनीषा चौधरी तयशुदा मैदान में 3 से 4 मिनट बाद पहुंची।
लघु सचिवालय में सायरन बजते ही दफ्तरों में मौजूद अधिकारी-कर्मचारी तुरंत लघु सचिवालय के सामने बने पार्क में पहुंचे। यहां पहुंचने पर कर्मचारियों को बताया गया कि यह भूकंप को लेकर मॉक ड्रिल थी। आप सभी सुरक्षित हैं। अब अपने काम पर वापस लौट सकते हैं। प्रशासन की पहले से तय टीम सेना की टुकड़ी के साथ अब भवन में फंसे घायलों को बचाने के लिए अभियान चलाएगी।
मॉक ड्रिल की बड़ी खामियां
1. पूरी प्लानिंग के बावजूद अधिकारियों में खराब कम्युुनिकेशन रहा।
2 प्रशासन के पास पर्याप्त वायरलेस सेट नहीं थे।
3. अधिकारियों को वॉकी-टॉकी की फ्रिक्वेंसी का पता नहीं था।
4. प्रशासनिक अधिकारी मिलिट्री टीम से समन्वय नहीं कर पाए।
5. सीआईएसएफ की टीम 30 मिनट देरी से पहुंची।
6. एंबुलेंस और स्ट्रेचर की कमी रही।
7. हैवी बिल्डिंग लेंटर कटर नहीं मिले।
8. बहुमंजिला भवनों से बचाने के लिए सीढ़ियां कम पड़ी।
9. जहाजपुल स्कूल में एंबुलेंस 35 मिनट में पहुंची, जोकि पांच से सात मिनट में पहुंच जानी चाहिए थी।
10 पानी के लिए टैंकर तक उपलब्ध नहीं कराए जा सके।
20 मिनट में बनाया ईओसी
भूकंप आने की घोषणा के 20 मिनट बाद जिला सभागार में ईओसी (इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर) स्थापित किया गया। यहां उपायुक्त निखिल गजराज, एसपी मनीषा चौधरी, सीटीएम शालिनी चेतल सहित सभी विभागों के अध्यक्ष पहुंचे। यहां पहुंचकर उपायुक्त ने एक्ट के तहत निर्धारित रिस्पॉन्सिबल अफसर के रूप में अपनी भूमिका के तहत एडीसी एएस मान को इंसीडेंट कमांडर, पुलिस अधीक्षक को सुरक्षा अधिकारी, सीटीएम को लाइजनिंग ऑफिसर, डीआईपीआरओ को मीडिया को-ऑर्डिनेटर नियुक्त करते हुए तुरंत प्लानिंग, लॉजिस्टिक और ऑपरेशन की शाखाओं का गठन किया।
सेक्टर-15 के सामुदायिक केंद्र को बनाया राहत शिविर
उपायुक्त ने महाबीर स्टेडियम को स्टेजिंग एरिया बनाते हुए सभी विभागों को क्रेन, जेसीबी, ट्रैक्टर-ट्रॉलियां, ट्रक, एंबुलेंस और अन्य उपकरण यहां भिजवाने के निर्देश दिए। स्टेजिंग एरिया के लिए उन्होंने एसडीएम परमजीत चहल को नोडल अधिकारी नियुक्त किया। उपायुक्त ने सेक्टर-15 के सामुदायिक केंद्र को राहत शिविर के रूप में प्रयोग करने के निर्देश दिए। इसके पश्चात सभी अधिकारी अपनी जिम्मेदारियां निर्वहन में जुट गए।
वायरलेस सेट से दिए निर्देश
मोबाइल और टेलीफोन नेटवर्क ठप होने पर डिस्ट्रिक्ट रेडियो अफसर और पुलिस विभाग को अपने वायरलेस उपकरण चालू करने के निर्देश दिए। मुख्य चिकित्सा अधिकारी तुरंत घायलों के उपचार की व्यवस्था करवाने और जरूरत पड़ने पर निजी अस्पतालों की मदद लें। उन्होंने सेना, एनसीसी, एनडीआरएफ की टुकड़ियां बुलाकर जल्द राहत अभियान शुरू करवाने के आदेश जारी किए।