अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
बरसात के कारण भरे पानी से सातरोड़ खुर्द, सातरोड़ कलां, लाडवा, डाबड़ा गांव में करीब 2200 एकड़ में फसलें डूब गई हैं। खेतों में करीब दो से चार फीट तक पानी भरा हुआ है। किसान अपने स्तर पर पानी की निकासी के लिए भरसक प्रयास कर रहे हैं। बिजली निगम किसानों को लाइट तक नहीं दे रहा।
अमर उजाला संवाददाता छोटी सातरोड़ की नहर पर पहुुंचे। यहां तेलूराम सिहाग, राकेश, बिंदर, सुमेश पूनियां, राजबीर पूनियां, राजेंद्र सूरा, शील शर्मा, नफे सिंह, कुलदीप नेहरा, होशियार सिंह पूनियां, राममेहर पूनियां नहर पर थे। यहां ड्रेन पर पंप लगाकर पानी की निकासी में लगे हुए थे। इन लोगों ने खेत में खडे़ होकर दिखाया कि तीन से चार फीट पानी भरा हुआ है। किसानों ने कहा कि ड्रेन से पानी निकालने के लिए खुद ही लगे हैं। विभाग की ओर से केवल दो मोटर मिली थीं। वह भी हमने खुद की लाकर लगाई।
सातरोड़ खुर्द के किसान नफे सिंह पूनिया अपने खेत में इंजन लगाकर पानी की निकासी कर रहे थे। किसान ने बताया कि डीजल जलाकर पानी की निकासी करा रहे हैं। अगर पानी नहीं निकालेंगे तो धान की बिजाई नहीं हो सकेगी। बुुआई का यह समय निकल गया तो पूरे छह महीने के लिए खेत खाली रह जाएंगे। बच्चों को क्या खिलाएंगे। प्रशासन से मदद मांगने जाएंगे, तब तक सब कुछ उजड़ जाएगा।
करीब चार किलोमीटर दूर सातरोड़ कलां में नहर पर किसान शमशेर उर्फ लीलू पूनियां, अनिल पूनियां, रायसिंह पूनियां, विकास, संजीव पंचायत मेंबर, मनीष बीडीसी मेंबर, काका कृष्ण, शमशेर पूनियां बरसाती पानी निकासी के लिए भारी-भरकम पंप सेट जोड़ने में लगे हुए थे। इन लोगों के साथ सिंचाई विभाग के मेकेनिकल के कुछ कर्मचारी भी जुटे थे। किसानों ने बताया कि अब भी निकासी शुरू करेंगे तो भी सात दिन में पानी निकासी पूरी हो पाएगी।
आठ घंटे आ रही बिजली, कैसे होगी निकासी
किसानों की मुसीबत में साथ देने के लिए खड़े जिला परिषद सदस्य कृष्ण सातरोड़ ने कहा कि तीन दिन से पानी निकासी के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। हमें आठ घंटे बिजली मिल रही है। आपातकालीन में इसे 24 घंटे कराने के लिए निगम गए थे। वहां अधिकारी मीटिंग में मिले। पानी निकासी के लिए जिम्मेदार सिंचाई विभाग की मेकेनिकल विंग में कर्मचारी नहीं हैं। किसान खुद अपने कंधों पर भारी भरकम पंप और मोटर रखकर ला रहे हैं। विभाग बिजली देने में भी आनाकानी कर रहा है।
22 जून तक पूरे होने चाहिए थे काम
ड्रेन की सफाई और बरसाती पानी की निकासी के लिए सभी काम 22 जून तक पूरे होने चाहिए थे। यहां विभाग की ओर से मोटर लगाने का काम किया जाना चाहिए था। बिजली के अस्थायी मीटर लगने चाहिए थे। अब तक न सफाई हुई, न मीटर लगे, न ही पंपसेट लगाए गए।
करोड़ों का नुकसान, मुआवजा मिलने की उम्मीद भी कम
किसानों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। किसानों ने प्रति एकड़ हजारों रुपये खर्च कर धान, कपास, मूंग की फसल लगाई थीं, पूरी बर्बाद हो गई हैं। अब किसान इन खेत खाली कर दोबारा से बुआई करेंगे। इसमें दोबारा बुआई का खर्च होगा। किसानों को पानी इस बर्बाद फसल का किसी तरह का मुआवजा मिलने की उम्मीद भी नहीं। किसानों ने फसल बीमा कंपनी को फोन किया तो कंपनी के लोगों ने कहा अभी तो हमने प्रीमियम ही नहीं लिया। प्रीमियम लेने के बाद मुआवजे का हक बनता है।
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2200 एकड़ में फसल डूबने से करोड़ों का नुकसान
किसानों से बीमा कंपनी के अधिकारी बोले, अभी हमने प्रीमियम ही नहीं लिया तो मुआवजा कैसा