सुरेंद्र दलाल
हिसार। भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान में 70 लाख रुपये की लागत से बिछाई गई पाइपलाइन से चार साल में भूमि सिंचाई के लिए एक बूंद भी नहरी पानी नहीं मिल सका है। पानी उपलब्ध न होने से संस्थान की करीब 200 एकड़ जमीन को सिंचित न कर पाने से गेहूं और जौ के उत्तम बीज तैयार करने में दिक्कतें आ रही हैं।
करीब 4 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन का काम केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) के जरिये कराया गया था। इस पाइपलाइन को लेकर 7 अधिकारियों ने आपत्ति जताई, लेकिन उन सभी को कमेटी से हटा दिया गया। आपत्ति के बावजूद पाइपलाइन को टेकओवर किया गया। इस मामले की शिकायत मिलने पर सेंट्रल विजिलेंस ने जांच शुरू कर दी है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने करनाल में भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान स्थापित किया हुआ है। जिसका बीज एवं अनुसंधान केंद्र हिसार में है। वर्ष 2013 में स्थापित किए गए करीब 200 एकड़ के इस केंद्र में गेहूं व जौ की अलग-अलग किस्मों के बीज तैयार किए जाते हैं। इस केंद्र में सिंचाई की व्यवस्था केवल बोरवेल पर आधारित थी। अधिकारियों ने केंद्र में नहरी पानी से सिंचाई के लिए 70 लाख रुपये का प्रोजेक्ट बनाया। वर्ष 2016 में यह काम शुरू किया गया। करीब चार किलोमीटर में आरसीसी की 600 एमएम गोलाई की 1242 पाइप लगाई जानी थी। 68 जगह चैंबर बनाए जाने थे। इसके अलावा 53 पीवीसी पाइपलाइन और 31 गेट वाल बनाए जाने थे। यह काम केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के माध्यम से कांट्रेक्टर से कराया गया।
केंद्र प्रभारी ने फरवरी 2017 में गिनाईं खामियां तो हो गया था तबादला
- निर्माण पूरा होने पर फरवरी 2017 में केंद्र के प्रभारी ओपी ढिल्लों ने मुख्यालय को पत्र लिखकर इस पाइपलाइन की खामियों को उजागर करते हुए इसमें सुधार कराने का अनुरोध किया। कुछ दिनों बाद ही केंद्र प्रभारी का तबादला कर दिया गया।
- इसके बाद 1 जून 2017 को डॉ. आरके शर्मा की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी बनी, जिसने पाइपलाइन का निरीक्षण किया। कमेटी ने पाइपलाइन के लेवल, पाइपलाइन को मिट्टी में दबाए जाने, लीकेज सहित अन्य खामियों को गिनाया। साथ ही कहा कि इन कमियों को दूर करने के बाद ही इसे टेकओवर किया जाए।
- अगस्त 2017 में हिसार केंद्र के इंचार्ज प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. जोगेंद्र सिंह ने अधिकारियों को इस पाइपलाइन की खामियों को उजागर करते हुए मुख्यालय को पत्र भेजा। उन्होंने कहा चार प्रमुख बिंदुओं को चिह्नित करते हुए सुधार का अनुरोध किया। लाइन को टेकओवर करने से पहले इस सुधार को पूरा कराने के लिए लिखा।
- 8 नवंबर 2017 को डॉ. आरके शर्मा की अध्यक्षता वाली कमेटी ने एक बार फिर से निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट केंद्र मुख्यालय को दी। इसमें पाइपलाइन में कमियों को उजागर किया। इनमें सुधार के बाद ही पाइपलाइन को अपने अधीन लेने का सुझाव दिया।
- 14 दिसंबर 2017 को आईसीएआर दिल्ली के कार्यकारी अभियंता एसपी मनचंदा की अध्यक्षता में 9 सदस्यीय टीम ने मौके का मुआयना किया। इसमें आउटलेट, पाइपलाइन की जमीन से ऊंचाई, वाटर टैंक सहित कई बिंदुओं पर सवाल उठाया।
- 10 मार्च 2018 को प्रिंसिपल साइंटिस्ट चुन्नीलाल की अध्यक्षता में बनी तीन सदस्यीय कमेटी ने तीन बिंदुओं वाली रिपोर्ट में खामियां गिनाईं।
- 24 अगस्त 2018 को कार्यकारी अभियंता एसपी मनचंदा की अध्यक्षता में 7 सदस्यीय टीम ने फिर से मुआयना किया।
- 25 अगस्त 2018 को डॉ. अरुण गुप्ता की अध्यक्षता में बनी चार सदस्यीय कमेटी ने कहा कि हिसार केंद्र के इंचार्ज पानी की उपलब्धता के दिन इसकी जानकारी उपलब्ध कराएं।
- 28 अगस्त 2018 को केंद्र के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी सचिन अग्निहोत्री ने सीपीडब्ल्यूडी के कार्यकारी अभियंता को पत्र भेजा। इसमें कहा कि डॉ. अरुण गुप्ता की टीम की ओर से गिनाई गईं खामियों को दूर करने का अनुरोध किया। इस पत्र के साथ उन्होंने सुबूत के तौर पर कुछ फोटो भी लगाए।
सवाल उठे पर टेकओवर कर दिया
अधिकारियों के लगातार इस पाइपलाइन पर सवाल उठाए जाने के बाद भी 11 अक्तूबर 2018 को इसे टेकओवर कर लिया। टेकओवर रिपोर्ट में भी पाइप की संख्या, चैंबर, गेट वाल की संख्या को ही बताया गया। रिपोर्ट में पाइप लाइन की लंबाई तक का उल्लेख नहीं किया गया। कार्य संतोषजनक है या नहीं, इस पर कोई टिप्पणी नहीं की गई। टेकओवर करने वाली टीम के नाम लिखे जाने के बजाय केवल चार लोगों के हस्ताक्षर दिखाए गए। हालांकि हैंड ओवर करने वालों की ओर से सीपीडब्ल्यूडी के जेई के हस्ताक्षर हैं।
मुझे इस बारे में कोई शिकायत नहीं मिली। विजिलेंस जांच शुरू होने की मुझे जानकारी नहीं है। इस बारे में इससे अधिक कुछ नहीं कहना चाहता। - ज्ञान प्रताप सिंह, निदेशक, गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल
करनाल संस्थान के निदेशक ही इस बारे में अधिक जानकारी दे सकते हैं। मेरे संज्ञान में अभी ऐसा मामला नहीं है।
- टीआर शर्मा, डिप्टी डायरेक्टर जनरल, आईसीएआर, दिल्ली
केंद्रीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान के हिसार केंद्र में पाइप लाइन बंद अवस्था में- फोटो : Hisar
केंद्रीय गेहूं व जौ अनुसंधान के हिसार केंद्र में डाली गई चार किलोमीटर लंबी लाइन- फोटो : Hisar