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चिकित्सकों ने भी दे दिया था जवाब, फिर भी नन्हों देवी ने जीती कोरोना से जंग

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हिसार। कोरोना का संक्रमण अबकी बार सीधा फेफड़ों पर अटैक कर रहे हैं, जिस कारण अधिकतर मरीज दम तोड़ रहे हैं। ऐसे हालात में यदि हौसला रखा जाए तो संक्रमण से जंग जीती जा सकती है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया गांव बालसमंद निवासी 55 वर्षीय नन्हों देवी ने, जिनके फेफड़ों में 70 प्रतिशत तक संक्रमण फैल चुका था और चिकित्सकों ने भी हालत देख जवाब दे दिया था। फिर भी नन्हों देवी ने हिम्मत नहीं हारी और संक्रमण से लड़ती रही। करीब छह दिन बाद कोरोना से जंग जीती।
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महिला के बेटे पवन कुमार ने बताया कि मेरी मां को पहले से ही शुगर की शिकायत है। 4 मई को उनको सांस की शिकायत हुई थी। इस वजह से उनका गांव के ही पीएचसी पर टेस्ट करवाया था, जिसकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई थी। उस समय उनकी शुगर भी 500 से ऊपर और ऑक्सीजन लेवल भी 55 पर आ गया था। उनकी यह हालत देख चिकित्सकों ने भी जवाब दे दिया था। हमने भी काफी प्रयास किया, लेकिन किसी भी अस्पताल में बेड खाली नहीं था। आखिरकार हमने उनका घर पर ही उपचार शुरू किया और 6 दिन तक ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा। उस दौरान ऑक्सीजन सिलिंडर भी बड़ी मुश्किल से एक ही मिला था, जिसे बार-बार भरवाने में परेशानी होती थी। ऐसे में हमने गुरुग्राम से ऑक्सीजन कंन्संट्रेटर खरीदा। इसके अलावा ऑक्सीमीटर थर्मामीटर एवं नेबुलाइजर भी खरीदने पड़े। अब उनकी माता के स्वास्थ्य में काफी सुधार है। हमने उनके खाने-पीने का भी काफी विशेष ध्यान रखा और और उनकी नियमित दवा सुचारु रखी जैसे कि नारियल पानी, नींबू पानी, मौसमी का जूस, आयुष काढ़ा, पपीता, कीवी आदि। पवन ने बताया कि उसकी मां की रिपोर्ट अब निगेटिव आ गई है।
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